पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में की एयरस्ट्राइक, 16 की मौत: एक ही परिवार के सदस्य मलबे में दबे; TTP के 7 कैंप तबाह करने का दावा

By : hashtagu, Last Updated : February 22, 2026 | 1:41 pm

नांगरहार/पक्तिका (अफगानिस्तान)। पाकिस्तान की सेना ने रविवार तड़के अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक (Airstrike) यानी हवाई हमला (Aerial Attack) किया। पाकिस्तान ने इसे इंटेलिजेंस बेस्ड ऑपरेशन (Intelligence Based Operation) बताया है। इस कार्रवाई में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (Tehreek-e-Taliban Pakistan – TTP) और इस्लामिक स्टेट (Islamic State) से जुड़े सात कैंपों (Camps) और ठिकानों (Hideouts) को निशाना बनाने का दावा किया गया है। अमेरिकी मानवाधिकार संगठन इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (IHRF) के अनुसार इन हमलों में 16 लोगों की मौत हुई है, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान सेना ने कहा है कि हालिया आत्मघाती हमलों का बदला लेने के लिए यह जवाबी कार्रवाई की गई। पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि उनके पास पुख्ता सबूत हैं कि पाकिस्तान में हुए हमलों की साजिश अफगानिस्तान की जमीन से चल रहे नेटवर्क ने रची थी।

अफगानिस्तानी मीडिया टोलो न्यूज के अनुसार नांगरहार प्रांत में एक घर को निशाना बनाया गया, जहां एक ही परिवार के 23 लोग मलबे के नीचे दब गए। अब तक केवल चार लोगों को निकाला जा सका है। हमला उस समय हुआ जब पूरा परिवार सो रहा था, इसलिए किसी को बच निकलने का मौका नहीं मिला।

अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने इन हमलों को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया है और कहा है कि सही समय पर पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया जाएगा। अफगान सूत्रों के मुताबिक पक्तिका प्रांत में एक धार्मिक स्कूल पर ड्रोन हमला भी किया गया, जबकि नांगरहार में भी अलग से कार्रवाई हुई। पाकिस्तान का कहना है कि उसने सिर्फ आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया, लेकिन अफगान स्रोतों का दावा है कि आम नागरिकों को नुकसान पहुंचा है।

पाकिस्तान लंबे समय से तालिबान सरकार पर दबाव डालता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल किसी भी आतंकी संगठन को न करने दे। इस्लामाबाद का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान से संचालित हो रहा है, जबकि तालिबान इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि 29 फरवरी 2020 को कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच हुए समझौते के तहत तालिबान पर दबाव बनाया जाए। इस समझौते में तालिबान ने वादा किया था कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ किसी भी आतंकी गतिविधि के लिए नहीं होने दिया जाएगा। इसमें अल-कायदा और अन्य अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठनों से संबंध तोड़ने और उन्हें भर्ती, प्रशिक्षण या फंडिंग की अनुमति न देने की बात भी शामिल थी। इस समझौते के बाद अमेरिका ने 2021 में अपनी सेना वापस बुला ली थी और तालिबान ने काबुल पर कब्जा कर लिया था।

एयरस्ट्राइक से कुछ घंटे पहले खैबर पख्तूनख्वा के बन्नू जिले में सुरक्षा काफिले पर आत्मघाती हमला हुआ था, जिसमें दो सैनिकों की मौत हो गई, जिनमें एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी शामिल थे। 16 फरवरी को बाजौर में विस्फोटकों से भरी गाड़ी सुरक्षा चौकी से टकरा दी गई थी, जिसमें 11 सैनिक और एक बच्चे की मौत हुई थी। अधिकारियों ने हमलावर को अफगान नागरिक बताया था।

6 फरवरी को इस्लामाबाद में जुमे की नमाज के दौरान एक शिया मस्जिद (इमामबाड़ा) में आत्मघाती हमला हुआ था। पाकिस्तानी अखबार द डॉन के मुताबिक इस हमले में 31 लोगों की मौत और 169 लोग घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी इस्लामिक स्टेट ने ली थी।

अक्टूबर में सीमा पर हुई हिंसक झड़पों के बाद से दोनों देशों के रिश्ते पहले से ही तनावपूर्ण हैं। 19 अक्टूबर को कतर की मध्यस्थता में युद्धविराम हुआ था, लेकिन तुर्किये के इस्तांबुल में हुई वार्ता किसी औपचारिक समझौते तक नहीं पहुंच सकी। 9 अक्टूबर को काबुल में TTP के ठिकानों पर हवाई हमले हुए थे, जिनके लिए तालिबान ने पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि पाकिस्तान ने सीधे तौर पर इसकी पुष्टि नहीं की थी, लेकिन उसने तालिबान को चेतावनी दी थी कि वह अपनी जमीन पर TTP को पनाह न दे।