पोकरण परमाणु परीक्षण को याद कर बोले पीएम मोदी- दुनिया भारत को दबाने उतरी थी, लेकिन हम डटे रहे

By : hashtagu, Last Updated : May 11, 2026 | 4:09 pm

सोमनाथ, गुजरात: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को गुजरात के सोमनाथ मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष पूरे होने के कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 11 मई 1998 को हुए पोकरण परमाणु परीक्षण (Pokhran Nuclear Test) को याद करते हुए कहा कि उस समय दुनिया की बड़ी ताकतें भारत को दबाने के लिए मैदान में उतर आई थीं, लेकिन भारत डरा नहीं और मजबूती से डटा रहा।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज का दिन देश के लिए दोहरी ऐतिहासिक अहमियत रखता है। एक तरफ सोमनाथ मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के 75 साल पूरे हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी दिन भारत ने पोखरण में परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई थी। उन्होंने कहा कि भारत ने इस मिशन को “ऑपरेशन शक्ति” (Operation Shakti) नाम दिया था, क्योंकि शिव और शक्ति की आराधना भारत की परंपरा का हिस्सा रही है।

पीएम मोदी ने भगवान सोमनाथ को नमन करते हुए कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था, आत्मविश्वास और पुनर्निर्माण की शक्ति का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि लुटेरों ने कई बार इस मंदिर को तोड़ने की कोशिश की, लेकिन हर बार इसका पुनर्निर्माण हुआ। यह भारत की सांस्कृतिक शक्ति और अटूट विश्वास को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोई भी राष्ट्र तब तक मजबूत नहीं बन सकता, जब तक वह अपनी जड़ों और विरासत से जुड़ा न रहे। उन्होंने कहा कि भारत में विरासत और आधुनिकता एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि साथ-साथ चलने वाली ताकतें हैं।

पीएम मोदी ने बिना नाम लिए विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में सांस्कृतिक और धार्मिक स्थलों के पुनर्निर्माण को लेकर राजनीति की गई। आज भी कुछ ताकतें राष्ट्रीय स्वाभिमान से ज्यादा तुष्टिकरण की राजनीति को महत्व देती हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया की कोई ताकत भारत को झुका नहीं सकती और न ही दबा सकती है। पोखरण परमाणु परीक्षण इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

गौरतलब है कि 11 मई 1998 को तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भारत ने दूसरा परमाणु परीक्षण किया था। यह मिशन बेहद गोपनीय तरीके से पूरा किया गया था और विदेशी खुफिया एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी थी। परीक्षण के बाद अमेरिका, जापान समेत कई पश्चिमी देशों ने भारत पर आर्थिक और तकनीकी प्रतिबंध लगाए थे, लेकिन भारत ने अपने फैसले पर मजबूती से कायम रहते हुए दुनिया के सामने अपनी रणनीतिक और वैज्ञानिक ताकत साबित की थी।