पश्चिम बंगाल में इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों की सरकारी भत्ता योजना बंद, 1 जून से लागू होगा फैसला

By : hashtagu, Last Updated : May 18, 2026 | 11:43 pm

कोलकाता: पश्चिम बंगाल (West Bengal) सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए इमाम (Imam), मुअज्जिन (Muezzin) और पुजारियों (Purohit) को दी जाने वाली मासिक भत्ता (Honorarium) योजना बंद करने का ऐलान किया है। राज्य कैबिनेट ने फैसला किया है कि धर्म आधारित सभी सहायता योजनाएं 1 जून 2026 से समाप्त कर दी जाएंगी।

यह फैसला मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार की ओर से कहा गया कि सूचना एवं संस्कृति विभाग और अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े विभागों के जरिए चल रही धार्मिक वर्गीकरण आधारित योजनाओं को अब बंद किया जाएगा। मई महीने तक मौजूदा व्यवस्था जारी रहेगी, लेकिन जून से यह पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

राज्य सरकार ने इसके साथ ही महिलाओं के लिए नई “अन्नपूर्णा योजना” शुरू करने का भी ऐलान किया है। इस योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 3 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी। इसके अलावा राज्य परिवहन की बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा देने को भी मंजूरी मिली है।

पश्चिम बंगाल में इमाम और मुअज्जिन भत्ता योजना की शुरुआत वर्ष 2012 में ममता बनर्जी सरकार ने की थी। बाद में पुजारियों के लिए भी सम्मान राशि योजना शुरू की गई थी। मार्च 2026 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले ममता सरकार ने पुजारियों और मुअज्जिनों के मासिक भत्ते में 500 रुपए की बढ़ोतरी की थी, जिसके बाद उन्हें हर महीने 2 हजार रुपए मिलने लगे थे।

इस योजना को लेकर पहले भी विवाद हो चुका है। 2013 में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इमाम और मुअज्जिनों को सरकारी भत्ता देने को असंवैधानिक बताया था। बाद में यह सहायता वक्फ बोर्ड के जरिए जारी रखी गई थी।

राजनीतिक तौर पर इस फैसले को बड़ा माना जा रहा है। भाजपा लंबे समय से इन योजनाओं को “तुष्टिकरण की राजनीति” बताकर विरोध करती रही है। वहीं तृणमूल कांग्रेस का कहना था कि धार्मिक और सामाजिक सेवाएं देने वाले लोगों को आर्थिक सहायता देना सरकार की जिम्मेदारी है।