धर्मांतरण विवाद पर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में 26 परिवारों का गांव निकाला, श्मशान घाट के पास पुलिस सुरक्षा में गुजारी रात
By : hashtagu, Last Updated : June 24, 2026 | 1:49 pm
नारायणपुर (छत्तीसगढ़): बस्तर संभाग के नारायणपुर जिले में धर्मांतरण (Conversion) को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जिले के भरंडा गांव में आदिवासी समुदाय और ईसाई (Christian) धर्म अपना चुके परिवारों के बीच तनाव बढ़ने के बाद 26 परिवारों को गांव छोड़ने के लिए कहा गया। हालात ऐसे बन गए कि इन परिवारों को गांव की सीमा से बाहर श्मशान घाट के पास पुलिस सुरक्षा (Police Protection) में रात गुजारनी पड़ी।
जानकारी के अनुसार, गांव के आदिवासी समाज ने आरोप लगाया है कि धर्म परिवर्तन कर चुके कुछ परिवार पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों, संस्कृति और स्थानीय देवी-देवताओं का सम्मान नहीं कर रहे हैं। इसके बाद ग्रामीणों ने सामूहिक फैसला लेते हुए इन परिवारों के गांव में रहने का विरोध किया। ग्रामीणों ने गांव की सीमाओं पर लकड़ियां और पेड़ों की डालियां रखकर रास्ते भी बंद कर दिए, ताकि निकाले गए परिवार वापस गांव में प्रवेश न कर सकें।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ये परिवार अपने मूल आदिवासी धर्म और परंपराओं में वापस लौटते हैं तो उन्हें गांव में रहने दिया जा सकता है। दूसरी ओर प्रभावित परिवारों का आरोप है कि उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें जबरन घरों से बाहर निकाल दिया गया। उनका कहना है कि वे भी गांव के स्थायी निवासी हैं और उन्हें अपने ही गांव में रहने से रोका जा रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए गांव और आसपास के क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन के अधिकारी दोनों पक्षों के बीच बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। फिलहाल प्रभावित परिवार पुलिस सुरक्षा में रह रहे हैं।
इस विवाद की शुरुआत 9 जून को हुई थी, जब ग्रामीणों ने कोंडागांव निवासी दीपक ठाकुर और उनकी पत्नी भुनेश्वरी ठाकुर पर कथित धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया। पहले दोनों को चेतावनी देकर छोड़ दिया गया था, लेकिन बाद में बढ़ते विरोध और जनदबाव के बीच 22 जून को पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 299 और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
इसके बाद भी ग्रामीणों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और 23 जून को 26 परिवारों के खिलाफ गांव निकाला जैसा फैसला सामने आया। प्रशासन अब पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और गांव में विशेष ग्राम सभा बुलाकर दोनों पक्षों के बीच सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि ग्राम सभा के फैसले तक ये 26 परिवार और उनके बच्चे कब तक गांव से बाहर पुलिस सुरक्षा में रहने को मजबूर रहेंगे। मामले को लेकर पूरे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है और प्रशासन शांति बनाए रखने की अपील कर रहा है।




