पद्म विभूषण तीजन बाई पंचतत्व में विलीन, राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार; 13 साल की उम्र में शुरू किया था पंडवानी गायन
By : hashtagu, Last Updated : July 5, 2026 | 5:59 pm
रायपुर: छत्तीसगढ़ की लोक कला और पंडवानी गायन को विश्वभर में पहचान दिलाने वाली पद्म विभूषण तीजन बाई (Teejan Bai) का शनिवार देर रात निधन हो गया। वह 70 वर्ष की थीं। उन्होंने रात 3:15 बजे रायपुर स्थित एम्स (AIIMS) में अंतिम सांस ली। वह पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थीं। रविवार सुबह 11 बजे उनका पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव गनियारी लाया गया, जहां राजकीय सम्मान (State Honours) के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण, कलाकार, जनप्रतिनिधि और प्रशंसक उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे।
तीजन बाई ने अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली अभिनय और अनोखी प्रस्तुति शैली के जरिए पंडवानी गायन को देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक नई पहचान दिलाई। महाभारत की कथाओं को गाने और सुनाने की प्रेरणा उन्हें अपने नाना से मिली थी। उन्होंने महज 13 साल की उम्र में पहली बार सार्वजनिक मंच पर पंडवानी का गायन किया और इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
भारतीय लोक कला में उनके अतुलनीय योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्होंने अपने लंबे कलात्मक जीवन में भारत सहित दुनिया के कई देशों में पंडवानी की प्रस्तुति देकर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि तीजन बाई ने अपनी भव्य प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक कला को पूरी दुनिया में नई पहचान दिलाई। उनका निधन कला और संस्कृति जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी शोक जताते हुए कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी के माध्यम से देश और विदेश में छत्तीसगढ़ का गौरव बढ़ाया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के कलाकारों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।




