भारत सरकार ने हटाई गैस आपूर्ति पर आपातकालीन पाबंदियां, पश्चिम एशिया में युद्धविराम के बाद LNG सप्लाई हुई सामान्य
By : hashtagu, Last Updated : July 5, 2026 | 2:24 pm
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (West Asia) में युद्धविराम (Ceasefire) लागू होने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से एलएनजी (LNG) की आपूर्ति सामान्य होने के बाद केंद्र सरकार ने प्राकृतिक गैस (Natural Gas) की आपूर्ति पर लगाई गई अधिकांश आपातकालीन (Emergency) पाबंदियां हटा दी हैं। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने अधिसूचना जारी कर प्राकृतिक गैस (आपूर्ति विनियमन) आदेश, 2026 में संशोधन किया है, जिससे मार्च में लागू किए गए कई विशेष प्रावधान समाप्त कर दिए गए हैं।
सरकार ने यह आपातकालीन व्यवस्था मार्च 2026 में आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत लागू की थी। उस समय पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित हो गई थी। कई आपूर्तिकर्ताओं ने फोर्स मेज्योर लागू कर दिया था और गैस की उपलब्धता पर संकट पैदा हो गया था। इसके बाद सरकार ने घरेलू प्राकृतिक गैस और आयातित एलएनजी की आपूर्ति को प्राथमिकता वाले उपभोक्ताओं तक सुनिश्चित करने के लिए विशेष नियम लागू किए थे।
मंत्रालय ने कहा कि अब क्षेत्र में युद्धविराम लागू है, बातचीत जारी है और होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री यातायात दोबारा शुरू हो चुका है। ऐसे में गैस आपूर्ति पर लागू अधिकांश आपातकालीन प्रतिबंधों की अब आवश्यकता नहीं रह गई है।
सरकार ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान तीन बड़े आपातकालीन कदम उठाए थे। इनमें गैस आपूर्ति पर नियंत्रण, रिफाइनरियों को पेट्रोकेमिकल्स से फीडस्टॉक हटाकर एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश और थोक उपभोक्ताओं को डीजल बिक्री पर नियंत्रण शामिल था। गैस आपूर्ति से पहले एलपीजी और डीजल से जुड़े दोनों प्रतिबंध पहले ही हटा लिए गए थे। अब गैस आपूर्ति संबंधी पाबंदियां भी समाप्त कर दी गई हैं।
भारत अपनी कच्चे तेल की लगभग 88 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरी करता है, जबकि प्राकृतिक गैस की करीब आधी मांग भी आयातित एलएनजी से पूरी होती है। देश के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 40 से 45 प्रतिशत और एलएनजी आयात का करीब 65 प्रतिशत पश्चिम एशिया से आता है। यही कारण है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी तरह का व्यवधान भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर डालता है।
मार्च में लागू आपातकालीन व्यवस्था के तहत सरकार ने घरेलू गैस, एलएनजी और रीगैसिफाइड एलएनजी के आवंटन को नियंत्रित किया था। पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG), परिवहन के लिए सीएनजी (CNG), एलपीजी उत्पादन और पाइपलाइन संचालन को प्राथमिकता दी गई थी। उर्वरक संयंत्रों को उनकी औसत गैस जरूरत का 70 प्रतिशत और औद्योगिक उपभोक्ताओं को लगभग 80 प्रतिशत गैस उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया था, जबकि पेट्रोकेमिकल इकाइयों और बिजलीघरों की गैस आपूर्ति में कटौती की गई थी।




