जो बस्तर कभी आकांक्षी जिला था, आज “बस्तर ओलंपिक” के नाम से पहचान बना: पीएम मोदी

By : hashtagu, Last Updated : February 5, 2026 | 9:14 pm

रायपुर, छत्तीसगढ़। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने संसद में अपने उद्बोधन के दौरान बस्तर का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए कहा कि जो बस्तर कभी आकांक्षी जिला (Aspirational District) माना जाता था, आज वह पूरे देश में “बस्तर ओलंपिक (Bastar Olympics)” के नाम से जाना जा रहा है। उन्होंने बताया कि विकास की धारा अब बस्तर के हर गांव तक पहुंच रही है। कई गांवों में पहली बार बस सेवा शुरू हुई और पूरे गांव ने इसे उत्सव की तरह मनाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले कुछ जिलों को पिछड़ा मानकर छोड़ दिया गया था। करोड़ों लोगों की मौलिक आवश्यकताओं को नजरअंदाज किया गया और उन्हें उसी अवस्था में जीने के लिए मजबूर किया गया। इन क्षेत्रों में विकास के अभाव ने हालात और बिगाड़ दिए थे। यहां तक कि ऐसे जिलों को “पनिशमेंट पोस्टिंग” के लिए उपयुक्त माना जाने लगा था। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब यह सोच बदली गई है। योग्य, युवा और होनहार अधिकारियों को तीन वर्ष का समय दिया गया, ताकि वे स्वतंत्र रूप से विकास के कार्य कर सकें। एक के बाद एक ठोस निर्णय लिए गए और आज परिणाम देश देख रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर छत्तीसगढ़ का सौभाग्य क्षेत्र है। यह प्राकृतिक दृष्टि से समृद्ध है, जिसमें सुंदर जलप्रपात, विश्वविख्यात कुटुमसर गुफा, विशाल अबूझमाड़ का जंगल और धुड़मारास गांव जैसी जगहें शामिल हैं। उन्होंने कहा कि लगभग चार दशकों तक नक्सलवाद के कारण विकास नहीं पहुंच पाया, जबकि क्षेत्रफल केरल से बड़ा है। अब स्थिति तेजी से बदल रही है। प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प, स्पष्ट नीति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस के कारण बस्तर में नक्सलवाद समाप्ति की ओर है और विकास ने नई गति पकड़ी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी विश्वास और उत्साह का परिणाम है कि बस्तर ओलंपिक का आयोजन पिछले वर्ष से किया जा रहा है। पिछले वर्ष इसमें 1 करोड़ 65 लाख युवाओं ने भाग लिया था, जबकि इस वर्ष यह संख्या बढ़कर 3 करोड़ 91 लाख तक पहुंच गई है। इसके अलावा, बस्तर पंडुम का आयोजन भी पिछले वर्ष और इस वर्ष किया जा रहा है। संभाग स्तरीय बस्तर पंडुम का शुभारंभ 7 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से होगा, जबकि समापन 9 फरवरी को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मुख्य आतिथ्य में होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर अब भय और पिछड़ेपन की पहचान नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और संभावनाओं (Trust, Development and Opportunities) का प्रतीक बन रहा है। यह परिवर्तन इस बात का प्रमाण है कि नीति, नीयत और नेतृत्व (Policy, Intent and Leadership) सही हो, तो दशकों की उपेक्षा को भी बदला जा सकता है।