बीजापुर। (Earlier this area was under the control of Naxalites) ऐसा नहीं है कि, पामेड़ के इस इलाके में सड़क नहीं थी। बल्कि 50 साल पहले भी यहां सड़क थी लेकिन वाहनों का संचालन नहीं होता था। धीरे-धीरे इस इलाके में नक्सलियों ने अपनी पैठ बढ़ाई और पूरे इलाके को अपने कब्जे में ले लिया। यही कारण था कि, इस इलाको को नक्सलियों की राजधानी कहा जाता था। अब यह इलाका सरकार के बड़े प्रोजेक्ट का हिस्सा बन चुका है। यहां पर कैंप खोले जा चुके हैं। सड़कों के विस्तार के साथ ही ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं भी मुहैया करवाई जा रही है।
छत्तीसगढ़ का बीजापुर जिला अब नक्सलियों के आतंक से आजादी की ओर अग्रसर है। जवानों की मेहनत और सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति के बलबूते जिले में तेजी से विकास हो रहा है। जहां कभी बड़ी मुश्किल से दुपहिया वाहन नजर आते थे वहां लगभग 50 सालों बाद यात्री बस सेवा शुरू (Passenger bus service started) कर दी गई है।
बीजापुर से सीधे पामेड़ जाती है यात्री बस
बीजापुर से सुबह पामेड़ के लिए जाने वाली बस आवापल्ली, बासागुड़ा, तररेम, चिन्नागेल्लूर, गुंडेम कोंडापल्ली जीडपल्ली करवगट्टा और धर्माराम होते हुए पामेड़ पहुंचती है। इस बस में रोजाना बड़ी संख्या में यात्री सफर करने लगे हैं। इन इलाकों में विकास कार्यों के विस्तार के लिए सरकार तो प्रतिबद्ध है ही लेकिन इस इलाके में हो रहे विकास का बड़ा श्रेय उन तमाम जवानों को जाता है जो दिन-रात नक्सली इलाके में डटकर लोगों को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने में लगे हैं।
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