CG-PSC भर्ती घोटाला: टामन सोनवानी, आरती वासनिक और ललित गनवीर की जमानत फिर खारिज

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि CG-PSC भर्ती घोटाले में गंभीर आरोप लगे हैं और मामले की जांच अभी जारी है।

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  • Publish Date - January 28, 2026 / 03:41 PM IST

बिलासपुर (छत्तीसगढ़): CG-PSC भर्ती घोटाला (Recruitment Scam) मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (High Court) ने तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी, तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और उप परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर की जमानत याचिकाएं दूसरी बार खारिज कर दी हैं। जस्टिस बीडी गुरु की सिंगल बेंच ने कहा कि यह मामला केवल आपराधिक नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं की भावनाओं, करियर और भविष्य (Career and Future) से जुड़ा हुआ है। सिर्फ लंबे समय से हिरासत (Custody) में होने के आधार पर आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि CG-PSC भर्ती घोटाले में गंभीर आरोप लगे हैं और मामले की जांच अभी जारी है। ऐसे में इस स्तर पर जमानत देना न्यायोचित नहीं होगा।

दरअसल, आरोप है कि इन अधिकारियों ने अपने रिश्तेदारों और रसूखदार लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए प्रश्नपत्र लीक (Paper Leak) किए और चयन प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली की। इस पूरे मामले की जांच सीबीआई (CBI Investigation) कर रही है।

सीबीआई के अनुसार, वर्ष 2020 से 2022 के बीच आयोजित राज्य सेवा परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुईं। जांच में सामने आया कि तत्कालीन अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग कर रिश्तेदारों और करीबी लोगों को अनुचित लाभ दिलाया।

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि एक निजी कंपनी से सीएसआर मद (CSR Fund) के तहत 45 लाख रुपए एक एनजीओ को दिए गए, जिसकी अध्यक्ष सोनवानी की पत्नी थीं। आरोप है कि इसी के बदले प्रश्नपत्र लीक किए गए।

सीबीआई ने बताया कि परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक और डिप्टी परीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर ने सोनवानी के निर्देश पर उद्योगपति श्रवण गोयल को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए। श्रवण गोयल ने यह प्रश्नपत्र अपने बेटे और बहू को दिए, जिनका चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ। वहीं, सोनवानी के भतीजों का चयन डिप्टी कलेक्टर और डिप्टी एसपी पद पर किया गया।

आरोपियों की ओर से दलील दी गई कि वे निर्दोष हैं, जांच लगभग पूरी हो चुकी है और कुछ सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। समानता के आधार पर उन्हें भी राहत दी जाए। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के मनीष सिसोदिया बनाम ईडी फैसले का हवाला भी दिया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों से यह प्रतीत होता है कि आरोपी इस षड्यंत्र में सक्रिय भूमिका में थे और अभी आगे की जांच बाकी है। इसलिए वर्तमान चरण में जमानत देना उचित नहीं है। इस तरह हाईकोर्ट ने तीनों आरोपियों की दूसरी जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

सीबीआई जांच में यह भी सामने आया कि CGPSC 2021 के टॉप-20 चयनित अभ्यर्थियों में से 13 से अधिक किसी न किसी अधिकारी, नेता या प्रभावशाली कारोबारी के रिश्तेदार थे। इसी आधार पर चयन सूची को कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिसके बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया।

चार्जशीट में सीबीआई ने साफ तौर पर कहा है कि परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक की प्रश्नपत्र लीक कराने में अहम भूमिका रही। पेपर लीक से लेकर चयन प्रक्रिया तक आंतरिक मिलीभगत के ठोस सबूत मिलने का दावा किया गया है। फाइनल चार्जशीट दाखिल होने के बाद मामले में जल्द ट्रायल शुरू होने की संभावना है।

सीबीआई के अनुसार, प्रश्नपत्र पहले कोलकाता की एक प्रिंटिंग कंपनी में छपवाए गए। जनवरी 2021 में कंपनी का कर्मचारी महेश दास सात सेट प्रश्नपत्र लेकर रायपुर आया और इन्हें आरती वासनिक को सौंपा। आरोप है कि पर्चे घर ले जाकर उनकी कॉपी की गई और फिर दोबारा सील कर प्रिंटिंग के लिए भेज दिया गया।

CGPSC परीक्षा 2021 में कुल 171 पदों के लिए भर्ती निकाली गई थी। प्री-एग्जाम 13 फरवरी 2022 को हुआ, जिसमें 2565 अभ्यर्थी सफल हुए। इसके बाद मई 2022 में हुई मुख्य परीक्षा में 509 उम्मीदवार पास हुए। इंटरव्यू के बाद 11 मई 2023 को 170 अभ्यर्थियों की अंतिम चयन सूची जारी की गई थी।