छत्तीसगढ़ विधानसभा में धर्म स्वतंत्रता विधेयक पेश, विपक्ष का वॉकआउट और हंगामा

सदन की कार्यवाही के दौरान शून्यकाल में विपक्ष ने SIR से जुड़े मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि प्रदेश में 19 लाख नाम हटाए गए हैं।

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  • Publish Date - March 19, 2026 / 03:58 PM IST

रायपुर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज गृहमंत्री विजय शर्मा (Vijay Sharma) ने धर्म स्वतंत्रता विधेयक (Freedom of Religion Bill) पेश किया। इस बिल (Bill) का उद्देश्य बल (force), प्रलोभन (inducement), धोखाधड़ी (fraud) या गलत जानकारी (misinformation) के जरिए कराए जाने वाले धर्मांतरण (religious conversion) पर रोक लगाना है। सरकार ने साफ किया कि इस पर चर्चा (discussion) के बाद इसे पारित (pass) किया जाएगा, लेकिन विपक्ष ने इस पर कड़ा विरोध जताते हुए सदन की कार्यवाही का बहिष्कार (boycott) कर दिया।

सदन की कार्यवाही के दौरान शून्यकाल में विपक्ष ने SIR से जुड़े मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया। नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि प्रदेश में 19 लाख नाम हटाए गए हैं। इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि यह जनहित का नहीं बल्कि चुनाव से जुड़ा विषय है, इसलिए इसे इस मंच पर उठाना उचित नहीं है। इस मुद्दे पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ और पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली, जिसके बाद विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।

विधानसभा में वीरता पदक प्राप्तकर्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं और अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी का मुद्दा भी उठा। विधायक सुनील सोनी ने रायपुर के भाठागांव स्वास्थ्य केंद्र का मामला उठाते हुए कहा कि वहां 5 डॉक्टरों के पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल 1 डॉक्टर ही उपस्थित रहता है। इस पर अजय चंद्राकर ने तंज कसते हुए कहा कि बाकी डॉक्टर फिल्म देखने गए हैं और फिल्म खत्म होने के बाद लौटेंगे, जिस पर सदन में हलचल बढ़ गई।

धर्म स्वतंत्रता विधेयक पेश होते ही नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने इसका विरोध किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के कानून पहले से कई राज्यों में लागू हैं और मामला सुप्रीम कोर्ट में भी विचाराधीन है, इसलिए इसे जल्दबाजी में पारित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि बिल को सेलेक्ट कमेटी के पास भेजा जाए, ताकि इस पर विस्तार से चर्चा हो सके और सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जजों के साथ सभी दलों के विधायकों की राय ली जाए।

महंत ने यह भी कहा कि कोई भी ऐसा फैसला नहीं होना चाहिए जिससे समाज में विभाजन बढ़े। उन्होंने संविधान और सहिष्णुता का हवाला देते हुए कहा कि सभी पक्षों की सहमति जरूरी है।

वहीं, भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कांग्रेस के आरोपों को गलत बताया और कहा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दौरान भी ऐसा कानून लागू किया गया था, इसलिए अब इसका विरोध करना उचित नहीं है। उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया है जिससे राज्य सरकार इस तरह का कानून नहीं बना सकती। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत राज्य सरकार को कानून बनाने का पूरा अधिकार है और यह विधेयक पूरी तैयारी के बाद लाया गया है।

सदन की कार्यवाही चला रहे धर्मलाल कौशिक ने कांग्रेस की आपत्तियों को खारिज करते हुए बिल पेश करने की अनुमति दे दी। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने वॉकआउट कर पूरे दिन की कार्यवाही का बहिष्कार किया। इस पर विजय शर्मा ने कहा कि विपक्ष चर्चा से भाग रहा है।

यह विधेयक पिछले सप्ताह राज्य कैबिनेट से मंजूर किया गया था। सरकार का कहना है कि इसमें 1968 के कानून को और मजबूत किया गया है और धर्मांतरण के नए तरीकों जैसे डिजिटल और आर्थिक प्रलोभन को भी शामिल किया गया है। फिलहाल राज्य में छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 1968 लागू है, जिसे राज्य गठन के बाद मध्य प्रदेश से अपनाया गया था।