कांकेर, छत्तीसगढ़। नक्सल प्रभावित इलाके में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है, जब डीवीसीएम (Divisional Committee Member) स्तर के माओवादी कमांडर मल्लेश ने खुद AK‑47 राइफल लेकर बीएसएफ (Border Security Force) कैंप में आत्मसमर्पण कर दिया। यह घटना मंगलवार रात छोटेबेठिया इलाके में हुई, जहां मल्लेश ने हथियार डालते हुए हिंसा को त्यागने की इच्छा जताई।
पुलिस और बस्तर रेंज के सूत्रों के अनुसार, मल्लेश लंबे समय से सुरक्षाबलों की निगरानी में था और उसे नक्सली संगठन में एक सक्रिय कमांडर के रूप में देखा जाता था। उसके सिर पर लगभग ₹8 लाख का इनाम घोषित था, जिससे यह आत्मसमर्पण सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है।
जानकारी के मुताबिक मल्लेश ग्रामीणों और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ बीएसएफ कैंप पहुंचा और उसने खुद AK‑47 सहित अन्य हथियार सौंप दिए। उसने मुख्यधारा (mainstream) में लौटने की इच्छा जताई है, जिसके बाद पुलिस उसकी पूछताछ कर रही है ताकि संगठन की आंतरिक गतिविधियों और नेटवर्क के बारे में अहम जानकारी हासिल की जा सके।
यह आत्मसमर्पण उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है जिसमें कुछ अन्य नक्सली सदस्य भी अपने हथियार छोड़ने के इच्छुक हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि सरकार की पुनर्वास (rehabilitation) नीति के तहत सैनिक और सामाजिक सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे नक्सलियों को मुख्यधारा में वापस आने के लिए प्रोत्साहन मिले।
इस घटना से नक्सल विरोधी अभियान को मजबूती मिली है और स्थानीय स्तर पर शांति तथा विकास को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।