छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में ED की सबसे बड़ी कार्रवाई, 1200 करोड़ की संपत्तियां अटैच; ढेबर सिटी और गोवा का वेस्टइन होटल भी शामिल

एजेंसी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों की डीड वैल्यू करीब 200 करोड़ रुपए है, जबकि उनका बाजार मूल्य 1000 करोड़ रुपए से अधिक आंका गया है।

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  • Publish Date - June 1, 2026 / 10:43 PM IST

रायपुर (छत्तीसगढ़): छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 1200 करोड़ रुपए की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच-Attached) किया है। इस कार्रवाई में कारोबारी अनवर ढेबर की ढेबर सिटी, गोवा स्थित वेस्टइन होटल (Westin Hotel) समेत कई अचल संपत्तियां, बैंक खाते, शेयर (Shares) और म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) शामिल हैं। ED ने यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की है।

ED के रायपुर जोनल कार्यालय ने 28 मई को तीन अलग-अलग अस्थायी कुर्की आदेश जारी किए। एजेंसी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियों की डीड वैल्यू करीब 200 करोड़ रुपए है, जबकि उनका बाजार मूल्य 1000 करोड़ रुपए से अधिक आंका गया है।

जांच एजेंसी के मुताबिक, पहले कुर्की आदेश में कारोबारी अनवर ढेबर और विकास अग्रवाल से जुड़ी अचल संपत्तियों को अटैच किया गया है। ED का दावा है कि विकास अग्रवाल कथित शराब सिंडिकेट के वित्तीय संचालन का प्रमुख हिस्सा था और डिस्टिलरियों तथा FL-10A लाइसेंसधारकों से कमीशन की राशि एकत्र कर सिंडिकेट तक पहुंचाने का काम करता था। इस कार्रवाई के तहत रायपुर स्थित ढेबर सिटी होम्स के कई भूखंडों के साथ-साथ शेल कंपनियों के नाम पर खरीदी गई कई जमीनों को भी कुर्क किया गया है। इन संपत्तियों का मूल्य करीब 30 करोड़ रुपए बताया गया है।

दूसरे कुर्की आदेश के तहत उत्तर गोवा के अंजुना में स्थित प्रीमियम वेस्टइन गोवा होटल को अटैच किया गया है। यह होटल पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज है। ED का आरोप है कि लगभग 110 करोड़ रुपए की लागत से खरीदी गई यह संपत्ति शराब घोटाले से अर्जित अवैध नकदी से खरीदी गई थी। जांच में यह भी दावा किया गया है कि नकदी के परिवहन का कार्य पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के निर्देश पर किया गया था।

तीसरे कुर्की आदेश के तहत ओम साई बेवरेजेस, दिशिता वेंचर्स और नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खाते, शेयर और म्यूचुअल फंड अटैच किए गए हैं। ED का आरोप है कि इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा कथित सिंडिकेट को देने के लिए मजबूर किया जाता था। एजेंसी के अनुसार, इस व्यवस्था के जरिए करीब 51 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की गई।

ED का कहना है कि शराब घोटाले से जुड़े आर्थिक लेन-देन और संपत्तियों की जांच अभी भी जारी है तथा मामले में आगे और कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि यह मामला छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित आर्थिक घोटालों में से एक माना जाता है और इसकी जांच कई स्तरों पर जारी है।