छत्तीसगढ़ में SC ST एक्ट के 2455 केस, तीन साल में 1013 रेप और 73 हत्या के मामले, 28 करोड़ की मदद

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन 2455 मामलों में 1013 मामले रेप के हैं। यानी कुल मामलों का लगभग 41 प्रतिशत हिस्सा रेप से जुड़ा हुआ है।

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  • Publish Date - March 14, 2026 / 01:06 PM IST

रायपुर : छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय (sc st act cases) से जुड़े अपराधों को लेकर बड़ा आंकड़ा सामने आया है। राज्य सरकार द्वारा विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार 1 जनवरी 2023 से 16 फरवरी 2026 तक SC ST एक्ट के तहत कुल 2455 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों में सबसे ज्यादा संख्या महिलाओं के खिलाफ अपराधों की है और इनमें भी रेप के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए हैं।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इन 2455 मामलों में 1013 मामले रेप के हैं। यानी कुल मामलों का लगभग 41 प्रतिशत हिस्सा रेप से जुड़ा हुआ है। औसतन हर तीन मामलों में से एक मामला दुष्कर्म का है। इसके अलावा इस अवधि में 73 हत्या के मामले भी दर्ज किए गए हैं।

सरकार के मुताबिक मारपीट कर चोट पहुंचाने के 380 मामले दर्ज हुए हैं जबकि गंभीर चोट पहुंचाने के 60 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा 30 मामलों में अपहरण की घटनाएं भी दर्ज की गई हैं। यह पूरा डेटा राज्य के अलग अलग जिलों से मिले रिकॉर्ड के आधार पर तैयार किया गया है।

यह जानकारी 12 मार्च को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सामने आई। बीजेपी विधायक पुन्नूलाल मोहले ने सरकार से पिछले तीन साल में SC ST एक्ट के तहत दर्ज मामलों की संख्या और उनमें शामिल अपराधों की जानकारी मांगी थी। इसके साथ ही उन्होंने यह भी पूछा था कि इन मामलों में से कितनों में पुलिस ने कोर्ट में चालान पेश किया है और कितने मामलों की जांच अभी जारी है। इस पर उपमुख्यमंत्री और गृहमंत्री विजय शर्मा ने लिखित जवाब में पूरा विवरण सदन में रखा।

जिलों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कुछ जिलों में मामलों की संख्या ज्यादा सामने आई है। सरकार के अनुसार जांजगीर चांपा जिले में सबसे ज्यादा 168 मामले दर्ज हुए हैं। इसके बाद बलरामपुर जिले में 165 केस दर्ज किए गए हैं। राज्य के 33 जिलों में से 8 जिलों में 100 से ज्यादा मामले सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार इन जिलों में लगातार शिकायतें दर्ज होने की वजह से मामलों की संख्या अधिक दिखाई देती है।

सरकार ने यह भी बताया कि बड़ी संख्या में मामलों में पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चालान पेश कर दिया है। अब तक 2269 मामलों में कोर्ट में चालान पेश किया जा चुका है। वहीं 166 मामलों की जांच अभी जारी है और जांच पूरी होने के बाद इनकी रिपोर्ट भी अदालत में पेश की जाएगी। इसके अलावा 20 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की गई है या केस खारिज कर दिए गए हैं।

SC ST एक्ट के तहत पीड़ितों को आर्थिक सहायता देने का भी प्रावधान है। सरकार के अनुसार अपराध की प्रकृति के आधार पर पीड़ितों को अलग अलग राशि दी जाती है। 16 फरवरी 2026 तक 1647 मामलों में पीड़ितों को आर्थिक मदद दी जा चुकी है।

राज्य सरकार के आंकड़ों के मुताबिक अब तक पीड़ितों को कुल 28 करोड़ रुपए से ज्यादा की आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। कई मामलों में यह राशि चरणों में दी जाती है और संबंधित विभागों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद भुगतान जारी किया जाता है।

हालांकि अभी भी कई मामलों में आर्थिक सहायता की प्रक्रिया लंबित है। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार 670 मामलों में मुआवजे की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो पाई है। इन मामलों के प्रस्ताव आदिम जाति विकास समिति की मंजूरी के लिए भेजे गए हैं। मंजूरी मिलने के बाद इन पीड़ितों को भी आर्थिक सहायता दी जाएगी।

सरकार की ओर से पेश किए गए आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन साल में राज्य के अलग अलग जिलों में SC ST एक्ट के तहत बड़ी संख्या में अपराध दर्ज हुए हैं। इनमें महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या सबसे अधिक है और अधिकतर मामलों में पुलिस ने जांच पूरी कर अदालत में चालान भी पेश कर दिया है।