नई दिल्ली/रायपुर, छत्तीसगढ़: 23 साल पुराने NCP नेता राम अवतार जग्गी हत्याकांड (Murder Case) में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी (AMit Jogi) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी दोषसिद्धि (Conviction) और उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी है। अमित जोगी ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका (Petition) दायर की थी, जिस पर 23 अप्रैल को सुनवाई हुई।
इस मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 6 अप्रैल को अमित जोगी को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। साथ ही 2 अप्रैल को कोर्ट ने उन्हें तीन हफ्तों के भीतर सरेंडर करने का आदेश भी दिया था। इसके बाद अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और याचिका में कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है, क्योंकि हाईकोर्ट ने उन्हें सुने बिना ही सीबीआई (CBI) की दलीलों के आधार पर करीब 40 मिनट में फैसला सुना दिया।
राम अवतार जग्गी हत्याकांड की जांच साल 2004 में सीबीआई को सौंपी गई थी। मृतक के बेटे सतीश जग्गी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी और उनके बेटे अमित जोगी पर हत्या का आरोप लगाया था। जांच के दौरान सीबीआई ने अमित जोगी को इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड बताते हुए सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की थी।
साल 2004 से 2007 तक चले ट्रायल के बाद 2007 में विशेष सीबीआई कोर्ट ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया गया था। इसके बाद सतीश जग्गी ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जहां से मामला दोबारा सुनवाई के लिए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजा गया।
हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को दोषी करार दिया और उन्हें तीन हफ्तों में सरेंडर करने का आदेश दिया था। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश से अमित जोगी को बड़ी राहत मिली है और उनकी सजा पर फिलहाल रोक लग गई है।