छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों पर सख्ती, फीस बढ़ोतरी 8% तक सीमित, किताब-यूनिफॉर्म थोपने पर कार्रवाई

स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर सभी कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भेज दिए हैं, ताकि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

  • Written By:
  • Publish Date - April 25, 2026 / 05:30 PM IST

रायपुर: छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) सरकार (Government) ने निजी स्कूलों (Private Schools) पर सख्ती बढ़ाते हुए दो बड़े फैसले (Decisions) लागू किए हैं। अब स्कूल मनमाने तरीके से फीस नहीं बढ़ा पाएंगे और न ही छात्रों पर किसी खास कंपनी की किताबें, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी (Stationery) खरीदने का दबाव बना सकेंगे। नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आदेश जारी कर सभी कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश भेज दिए हैं, ताकि नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जा सके।

सरकार ने साफ किया है कि छत्तीसगढ़ अशासकीय विद्यालय फीस विनियमन अधिनियम 2020 के तहत निजी स्कूल हर साल अधिकतम 8% तक ही फीस बढ़ा सकते हैं। यदि कोई स्कूल इससे ज्यादा फीस बढ़ाना चाहता है, तो उसे जिला फीस समिति से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही हर निजी स्कूल में फीस समिति का गठन भी जरूरी कर दिया गया है।

नियमों की निगरानी के लिए नोडल प्राचार्य और जिला शिक्षा अधिकारी को जिम्मेदारी दी गई है। अगर कोई स्कूल तय सीमा से ज्यादा फीस वसूलता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। नए शैक्षणिक सत्र के दौरान फीस बढ़ोतरी को लेकर आ रही शिकायतों के बीच यह फैसला अहम माना जा रहा है।

सरकार ने दूसरे आदेश में निजी स्कूलों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे NCERT और SCERT के अलावा किसी निजी प्रकाशक की किताबें छात्रों पर जबरदस्ती न थोपें। कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाई केवल NCERT की किताबों से ही कराई जाएगी।

कक्षा 9 से 12 तक भी छात्रों या अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या स्टेशनरी खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। इसके साथ ही शिकायतों के समाधान के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं।

लंबे समय से अभिभावक यह शिकायत कर रहे थे कि कई निजी स्कूल महंगी किताबें और तय दुकानों से यूनिफॉर्म व स्टेशनरी खरीदने का दबाव बनाते हैं, जिससे शिक्षा का खर्च काफी बढ़ जाता है। सरकार के इन आदेशों से अभिभावकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

इन फैसलों से फीस में मनमानी पर रोक लगेगी और किताबों व अन्य सामग्रियों के नाम पर बढ़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी कम हो सकता है। साथ ही यह संकेत भी मिला है कि सरकार अब शिक्षा से जुड़े व्यावसायिक पहलुओं पर भी सख्ती से नजर रख रही है।

यह फैसला ऐसे समय आया है जब महंगी शिक्षा और निजीकरण को लेकर बहस तेज है। ऐसे में इसे मिडिल क्लास अभिभावकों के लिए राहत और निजी स्कूलों पर बढ़ते नियामक दबाव के रूप में देखा जा रहा है।