छत्तीसगढ़ में खनिज माफियाओं पर सीएम साय का बड़ा प्रहार, 2 महीने में 1747 कार्रवाई, 6.49 करोड़ से ज्यादा जुर्माना वसूला

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल और मई 2026 के दौरान केवल दो महीनों में प्रदेशभर में कुल 1,747 मामलों में कार्रवाई की गई है।

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  • Publish Date - June 25, 2026 / 11:41 PM IST

रायपुर: छत्तीसगढ़ के प्राकृतिक संसाधनों की अवैध लूट करने वाले खनिज माफियाओं के खिलाफ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (Vishnu Deo Sai) ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बाद पूरे प्रदेश में अवैध उत्खनन (Illegal Mining), अवैध परिवहन (Illegal Transportation) और खनिजों के अवैध भंडारण (Illegal Storage) के खिलाफ व्यापक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। सरकार की इस कार्रवाई से खनिज माफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है और प्रशासन लगातार कार्रवाई कर रहा है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल और मई 2026 के दौरान केवल दो महीनों में प्रदेशभर में कुल 1,747 मामलों में कार्रवाई की गई है। इस दौरान अवैध गतिविधियों में शामिल लोगों पर 6 करोड़ 49 लाख 50 हजार 903 रुपये से अधिक का जुर्माना लगाया गया है। सरकार का कहना है कि खनिज संपदा की चोरी करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

विशेष अभियान के तहत सबसे अधिक 1,487 मामले अवैध परिवहन के दर्ज किए गए हैं। इसके अलावा अवैध उत्खनन के 231 मामले सामने आए हैं, जबकि अवैध भंडारण के 29 प्रकरण दर्ज किए गए हैं। इन आंकड़ों ने प्रदेश में सक्रिय खनिज माफियाओं के नेटवर्क और उनके संचालन के तरीके को उजागर कर दिया है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती रत्नगर्भा है और यहां मौजूद खनिज संसाधन प्रदेश की साढ़े तीन करोड़ जनता की संपत्ति हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की अवैध लूट, चोरी और दुरुपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कानून के दायरे में रहते हुए माफियाओं के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल होने का साहस न कर सके।

जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो अवैध उत्खनन के सबसे अधिक 44 मामले बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में दर्ज किए गए हैं। वहीं राजधानी रायपुर अवैध परिवहन और अवैध भंडारण के मामलों में सबसे आगे रहा है। रायपुर में अवैध परिवहन के 173 मामले दर्ज किए गए, जबकि जांजगीर-चांपा में 162 मामले सामने आए। अवैध भंडारण के सबसे अधिक 8 मामले भी रायपुर जिले में ही दर्ज किए गए हैं।

जुर्माने की वसूली के मामले में भी रायपुर जिला पूरे प्रदेश में शीर्ष पर रहा है। खनिज विभाग के अनुसार रायपुर में अवैध परिवहन के मामलों में 54.69 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला गया है। वहीं अवैध भंडारण के मामलों में 12.58 लाख रुपये की राशि वसूल की गई है।

बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिले में अवैध उत्खनन के खिलाफ सबसे बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। यहां खनिज माफियाओं से 55.32 लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया, जो प्रदेश में सबसे अधिक है। इससे स्पष्ट है कि सरकार केवल कार्रवाई ही नहीं कर रही, बल्कि आर्थिक दंड के जरिए भी अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने का प्रयास कर रही है।

प्रदेश में अवैध खनन गतिविधियों पर स्थायी नियंत्रण स्थापित करने के लिए साय सरकार ने गौण खनिज नियमों को और अधिक सख्त बना दिया है। नए नियमों के तहत अब किसी भी प्रकार के उल्लंघन के मामले में न्यूनतम 25 हजार रुपये से कम का जुर्माना स्वीकार नहीं किया जाएगा। इससे पहले कई मामलों में कम राशि जमा कर आरोपी आसानी से बच निकलते थे।

नए प्रावधानों के अनुसार अवैध परिवहन करते हुए पकड़े जाने पर संबंधित व्यक्ति को प्रति टन 2 हजार रुपये प्रशमन शुल्क देना होगा। इसके अलावा जब्त किए गए पूरे खनिज का वास्तविक बाजार मूल्य भी चुकाना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से अवैध खनन और परिवहन में शामिल लोगों को बड़ा आर्थिक झटका लगेगा और इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।

खनिज विभाग और जिला प्रशासन को लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि प्रदेश की खनिज संपदा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्राकृतिक संसाधनों की लूट में शामिल किसी भी व्यक्ति या गिरोह के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।