DMF घोटाले में पूर्व IAS अनिल टुटेजा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत, छत्तीसगढ़ छोड़ने की शर्त

अनिल टुटेजा को इस मामले में 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि वे 21 अप्रैल 2024 से ही न्यायिक रिमांड पर जेल में बंद थे।

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  • Updated On - May 18, 2026 / 11:04 PM IST

नई दिल्ली/रायपुर: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित डीएमएफ (DMF- District Mineral Foundation) घोटाला मामले में पूर्व IAS अधिकारी अनिल टुटेजा को जमानत (Bail) दे दी है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच ने कहा कि मामले में लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन इनकी अंतिम पुष्टि ट्रायल (Trial) के दौरान ही होगी। कोर्ट ने मेरिट पर कोई टिप्पणी किए बिना टुटेजा को राहत देने का फैसला सुनाया।

अनिल टुटेजा को इस मामले में 23 फरवरी 2026 को गिरफ्तार किया गया था। हालांकि वे 21 अप्रैल 2024 से ही न्यायिक रिमांड पर जेल में बंद थे। राज्य सरकार की ओर से कोर्ट में 2019 के कुछ व्हाट्सएप मैसेज पेश किए गए, जिनके आधार पर आरोपों की गंभीरता बताई गई।

वहीं टुटेजा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मामले के कई सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने कहा कि केस में 85 गवाह हैं और ट्रायल पूरा होने में काफी लंबा समय लगेगा। इसी आधार पर जमानत की मांग की गई।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मामले की सुनवाई पूरी होने और अंतिम फैसला आने में काफी समय लग सकता है। इसलिए लंबी न्यायिक हिरासत को देखते हुए जमानत देना उचित होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि टुटेजा को जमानत के लिए संबंधित अदालत में तय नियमों के अनुसार बॉन्ड जमा करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने अनिल टुटेजा की पूर्व प्रभावशाली प्रशासनिक भूमिका को देखते हुए गवाहों को प्रभावित करने की आशंका भी जताई। इसी कारण कोर्ट ने कड़ी शर्त लगाई कि रिहाई के बाद वे छत्तीसगढ़ राज्य से बाहर रहेंगे। उन्हें रिहाई के एक सप्ताह के भीतर अपने निवास की पूरी जानकारी एसीबी (ACB) और संबंधित पुलिस थाने को देनी होगी। साथ ही हर सुनवाई में अदालत में उपस्थित रहना होगा, जब तक अदालत से विशेष छूट न मिले।

क्या है DMF घोटाला?

छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक ईडी (ED- Enforcement Directorate) की रिपोर्ट के आधार पर ईओडब्ल्यू (EOW) ने धारा 120B और 420 के तहत केस दर्ज किया था। जांच में सामने आया कि कोरबा डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं की गईं।

आरोप है कि टेंडर भरने वालों को अवैध फायदा पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों के मुताबिक ठेकेदारों और बिचौलियों ने अधिकारियों और राजनीतिक संरक्षण के जरिए करोड़ों रुपये कमाए। इस मामले में संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी, मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर समेत कई लोगों के नाम सामने आए हैं।

जांच में यह भी दावा किया गया कि DMF प्रोजेक्ट्स में कमीशन का पूरा नेटवर्क बनाया गया था। आरोप है कि कलेक्टर को 40%, सीईओ को 5%, एसडीओ को 3% और सब इंजीनियर को 2% कमीशन मिलता था। करप्शन को आसान बनाने के लिए फंड खर्च के नियमों में बदलाव किया गया और मटेरियल सप्लाई, ट्रेनिंग, कृषि उपकरण, खेल सामग्री और मेडिकल उपकरण जैसी नई कैटेगरी जोड़ी गईं।

जांच एजेंसियों के अनुसार इन संशोधित नियमों के जरिए विकास कार्यों की बजाय ज्यादा कमीशन वाले प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई। कोरबा में करीब 575 करोड़ रुपए से ज्यादा के DMF घोटाले की जांच के दौरान यह खुलासे हुए हैं। रायपुर कोर्ट में एसीबी द्वारा पेश 6 हजार पेज की चार्जशीट में इन तथ्यों का जिक्र किया गया है।

ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि ठेकेदारों ने अधिकारियों और राजनीतिक नेताओं को कॉन्ट्रैक्ट राशि का 25% से 40% तक कमीशन दिया। रिश्वत की रकम को रिकॉर्ड में ‘अकोमोडेशन एंट्री’ के रूप में दिखाया गया। जांच के दौरान कई फर्जी कंपनियों, संदिग्ध दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइस बरामद किए गए। तलाशी में 76.50 लाख रुपए नकद जब्त किए गए, जबकि 35 लाख रुपए वाले 8 बैंक खातों को फ्रीज किया गया है।