रायपुर (छत्तीसगढ़)। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई (Bulldozer Action) को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। प्रभावित ग्रामीणों ने साय सरकार (Sai Government) को चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना पर्याप्त सुनवाई और उचित व्यवस्था के उनके घरों को ध्वस्त कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने विधायक आवास परियोजना के लिए उनके मकानों पर बुलडोजर चलाया, जिससे कई परिवार बेघर हो गए। प्रभावित लोगों ने सरकार से उचित पुनर्वास, मुआवजा और वैकल्पिक आवास की मांग की है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
नकटी गांव में हुई कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल भी गर्म हो गया है। भारतीय जनता पार्टी के सांसद ब्रजमोहन अग्रवाल ने भी प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को हटाना जरूरी था तो मानवीय तरीके से और पर्याप्त समय देकर यह प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए थी।
प्रशासन का कहना है कि जिन मकानों पर कार्रवाई की गई, वे सरकारी भूमि पर अतिक्रमण कर बनाए गए थे और यह जमीन विधायक आवास परियोजना के लिए चिन्हित है। प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था की जा रही है और उन्हें वैकल्पिक आवास उपलब्ध कराया जाएगा।
वहीं ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से इस जमीन पर रहने के बावजूद उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मिलता रहा। ऐसे में अब अचानक अतिक्रमण बताकर मकान तोड़ना उनके साथ अन्याय है। प्रभावित परिवारों ने सरकार से बुलडोजर कार्रवाई की समीक्षा करने और पुनर्वास की प्रक्रिया को जल्द पूरा करने की मांग की है।