डिप्टी सीएम अरुण साव को बंदर बताने पर बवाल, साहू समाज ने भूपेश बघेल से 10 दिन में माफी की मांग
By : hashtagu, Last Updated : January 2, 2026 | 10:23 pm
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) द्वारा उपमुख्यमंत्री अरुण साव की तुलना बंदर से किए जाने पर सियासी विवाद गहरा गया है। इस बयान को लेकर साहू समाज में भारी नाराजगी है। छत्तीसगढ़ साहू समाज ने चेतावनी दी है कि यदि भूपेश बघेल ने 10 दिनों के भीतर सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी तो राज्यभर में आंदोलन किया जाएगा। समाज ने यह भी ऐलान किया है कि सभी जिलों में पुलिस अधीक्षकों को ज्ञापन सौंपा जाएगा।
दरअसल, 29 दिसंबर 2025 को बिलासपुर दौरे के दौरान भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ी भाषा में एक कहानी के माध्यम से डिप्टी सीएम अरुण साव पर तंज कसा था। उन्होंने कहा था कि “जंगल के सभी जानवर मिलकर बंदर को राजा बना देते हैं”, जिसे अरुण साव से जोड़कर देखा गया। इस टिप्पणी को साहू समाज ने अपमानजनक बताया है।
साहू समाज का कहना है कि इस तरह की भाषा एक वरिष्ठ नेता को शोभा नहीं देती और इससे समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। समाज ने साफ कहा है कि यदि समय रहते माफी नहीं मांगी गई तो आंदोलन का रास्ता अपनाया जाएगा।
विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि भूपेश बघेल जैसे वरिष्ठ और अनुभवी नेता की भाषा और शब्दों में मर्यादा होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राजनीतिक आलोचना की जा सकती है, लेकिन इस तरह की उपमा उचित नहीं है।
वहीं कांग्रेस की ओर से बचाव में प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि भूपेश बघेल ने अपने भाषण में केवल एक कहानी का उदाहरण दिया था। उनका किसी भी जाति, धर्म या समाज का अपमान करने का कोई इरादा नहीं था। उन्होंने साहू समाज से अपील की कि पूरे भाषण का वीडियो देखने के बाद ही कोई निष्कर्ष निकालें।
बता दें कि बिलासपुर के लिंगियाडीह क्षेत्र में बस्ती हटाने के खिलाफ पिछले 37 दिनों से चल रहे आंदोलन के समर्थन में पहुंचे भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और डिप्टी सीएम अरुण साव पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने कहा था कि दो साल में सिर्फ 950 मीटर सड़क बनी है और किसी भी विभाग में काम नजर नहीं आ रहा। इसी दौरान उन्होंने अरुण साव के विभागों के कामकाज पर भी सवाल उठाए थे।
भूपेश बघेल के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है और अब यह मुद्दा सामाजिक आंदोलन की ओर बढ़ता नजर आ रहा है।




