भोपाल: केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने 74.77 करोड़ रुपये के कथित सरसों तेल (Mustard Oil) व्यापार वित्तपोषण (Trade Financing) घोटाले (Scam) में बड़ी कार्रवाई करते हुए मुरैना की केएस ऑयल्स लिमिटेड (KS Oils Ltd.), उसके तत्कालीन चेयरमैन रमेशचंद्र गर्ग समेत 12 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज की है। आरोप है कि वर्ष 2010 से 2014 के बीच राज्य व्यापार निगम (State Trading Corporation-STC) को साजिश, फर्जीवाड़े और नियमों की अनदेखी कर करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया।
सीबीआई के अनुसार, एसटीसी ने 75 करोड़ रुपये की स्वीकृत सीमा के बावजूद करीब 83.30 करोड़ रुपये के लेटर ऑफ क्रेडिट (Letter of Credit-LC) जारी कर दिए। करीब दस साल चली जांच में सामने आया कि सरसों तेल की आपूर्ति करने वाली दो कंपनियां, एमएस चंबल वैली एग्रो प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और एमएस ग्वालियर कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड, वास्तव में शेल कंपनियां थीं, जिनका संचालन पर्दे के पीछे से केएस ऑयल्स प्रबंधन द्वारा किया जा रहा था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि इन कंपनियों के माध्यम से जारी एलसी की राशि का बड़ा हिस्सा घुमाकर दोबारा केएस ऑयल्स के खातों में पहुंचाया गया। सीबीआई ने यह भी पाया कि मुरैना और गुना स्थित भंडारण टैंकों की निगरानी करने वाली एजेंसी स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड ने स्टॉक को प्रमाणित किया था, लेकिन सितंबर 2012 में मौके पर निरीक्षण के दौरान टैंकरों और टैंकों में सरसों तेल की जगह 90 प्रतिशत से अधिक पानी मिला।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि केएस ऑयल्स निर्धारित समय पर भुगतान और स्टॉक का निस्तारण नहीं कर सकी। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई करने के बजाय कंपनी को समय बढ़ाकर दिया, जिससे एसटीसी को 74.77 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
सीबीआई ने इस मामले में एसटीसी के तत्कालीन चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक एन.के. माथुर, निदेशक मनोज कुमार मिश्रा, खलील रहीम, महाप्रबंधक बी. वेंकटरम, बी.बी. साहा, समीर कौल सहित एसटीसी के सात पूर्व अधिकारियों को आरोपी बनाया है। इनके अलावा केएस ऑयल्स लिमिटेड, उसके तत्कालीन चेयरमैन रमेशचंद्र गर्ग, निदेशक दवेश अग्रवाल, स्टार एग्री वेयरहाउसिंग एंड कोलेटरल मैनेजमेंट लिमिटेड तथा उसके निदेशक अमित खंडेलवाल को भी आरोपी बनाया गया है।
सीबीआई ने सभी आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एजेंसी अब वित्तीय लेनदेन, एलसी जारी करने की प्रक्रिया, शेल कंपनियों की भूमिका और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी की विस्तृत जांच करेगी।