बजट 2026: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद आया ‘धुरंधर’ रक्षा बजट, सरकार रक्षा पर खर्च करेगी 5.94 लाख करोड़ रुपये

भारत सरकार ने खासतौर पर हथियारों, सैन्य उपकरणों और आधुनिक तकनीक की खरीद के लिए अपने कैपिटल बजट को लगातार बढ़ाया है।

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  • Updated On - February 1, 2026 / 01:27 PM IST

दिल्ली: भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को वित्तीय वर्ष 2027 के लिए बजट पेश किया। इस बजट में रक्षा क्षेत्र (defence budget) के लिए 5.94 लाख करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान जताया गया है। यह पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर के बाद का पहला बजट है, और माना जा रहा था कि इस ऑपरेशन की सफलता के बाद सरकार सेनाओं के लिए कुछ बड़ा कदम उठाएगी।

भारत सरकार ने खासतौर पर हथियारों, सैन्य उपकरणों और आधुनिक तकनीक की खरीद के लिए अपने कैपिटल बजट को लगातार बढ़ाया है। ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर हमला कर पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था। अब रक्षा क्षेत्र के बजट में इस बढ़ोतरी के साथ सरकार सेनाओं के आधुनिकीकरण पर जोर देगी।

पिछले साल हुआ था 5.67 लाख करोड़ का खर्च
पिछले साल रक्षा मंत्रालय के बजट को खर्च के लिए 5.67 लाख करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन इस बार सरकार ने इसे और बढ़ा दिया है। इस बार बजट में रक्षा क्षेत्र में 5.94 लाख करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है, जो हाल के सालों में बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए एक बड़ा कदम है। पाकिस्तान और चीन के बीच गठजोड़, साथ ही चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान की बढ़ती नजदीकियां भारत की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन रही हैं, जिससे भारत पूरी तरह तैयार रहना चाहता है।

आधुनिकीकरण पर जोर
इस रिकॉर्ड बजट के साथ भारतीय सेनाओं का आधुनिकीकरण तेज़ी से होगा। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के सालों में भारत को जिन सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ा है, उसे देखते हुए भारत को अपनी जीडीपी का 3 से 4 प्रतिशत रक्षा पर खर्च करना चाहिए। रक्षा मामलों की संसदीय समिति ने भी जीडीपी का 3 प्रतिशत खर्च करने का सुझाव दिया है। हालांकि, रक्षा बजट के कुल आवंटन का 46 प्रतिशत सैलरी पर खर्च हो जाता है, 24 प्रतिशत पेंशन पर और केवल 26 प्रतिशत ही रकम सेनाओं के आधुनिकीकरण और उनकी जरूरतों पर खर्च की जाती है।