LPG संकट के बीच सरकार का बड़ा फैसला, 5KG सिलेंडर सप्लाई बढ़ी और PNG कनेक्शन तेज

इसके साथ ही PNG कनेक्शन को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। मार्च से अब तक 4.24 लाख से ज्यादा नए PNG कनेक्शन जारी किए गए हैं, जबकि 30 हजार से ज्यादा लोगों ने LPG कनेक्शन छोड़कर PNG अपनाया है।

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  • Publish Date - April 12, 2026 / 09:35 PM IST

नई दिल्ली, भारत: देश में एलपीजी (LPG) की सप्लाई को लेकर स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने 5 किलोग्राम सिलेंडर (5kg Cylinder) की आपूर्ति बढ़ा दी है और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन का विस्तार (Expansion) भी तेजी से किया जा रहा है। यह कदम पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे संकट के कारण ईंधन (Fuel) सप्लाई प्रभावित होने के बाद उठाया गया है।

सरकारी जानकारी के अनुसार, 23 मार्च के बाद से 13 लाख से ज्यादा 5 किलोग्राम के छोटे LPG सिलेंडर बेचे जा चुके हैं और पिछले कुछ हफ्तों में इनकी दैनिक बिक्री 1 लाख से अधिक पहुंच गई है। इसका मुख्य उद्देश्य प्रवासी मजदूरों और कम आय वाले लोगों तक आसानी से गैस उपलब्ध कराना है।

इसके साथ ही PNG कनेक्शन को भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। मार्च से अब तक 4.24 लाख से ज्यादा नए PNG कनेक्शन जारी किए गए हैं, जबकि 30 हजार से ज्यादा लोगों ने LPG कनेक्शन छोड़कर PNG अपनाया है।

पश्चिम एशिया में चल रहे करीब 6 हफ्ते लंबे युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिसमें कच्चा तेल, गैस और LPG शामिल हैं, इसलिए इस संकट का असर देश पर भी पड़ा है। हालांकि सरकार ने अन्य देशों से आपूर्ति बढ़ाकर स्थिति को काफी हद तक संभाला है।

सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए होटल और रेस्टोरेंट जैसे कमर्शियल सेक्टर में LPG सप्लाई में कटौती की है, ताकि घरों में गैस की कमी न हो। साथ ही, जिन लोगों के पास सब्सिडी वाला गैस कनेक्शन नहीं है, उनके लिए 5 किलो वाले सिलेंडर की उपलब्धता बढ़ाई गई है।

सरकार का कहना है कि देश में LPG की कुल सप्लाई फिलहाल स्थिर बनी हुई है और किसी तरह की कमी की रिपोर्ट नहीं है। 11 अप्रैल को ही 52 लाख से ज्यादा सिलेंडर की डिलीवरी की गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वितरण व्यवस्था को मजबूत रखा गया है।

इसके अलावा, सरकार PNG और CNG की सप्लाई को भी प्राथमिकता दे रही है, ताकि लोग धीरे-धीरे LPG पर निर्भरता कम कर सकें और एक स्थिर व सुरक्षित ईंधन व्यवस्था बनाई जा सके।