ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर, क्या ₹93 के पार जाएगी गिरावट?

विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालने की प्रक्रिया भी जारी है। इस पूंजी बहिर्वाह (capital outflow) ने रुपये की कमजोरी को और बढ़ाया है।

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  • Publish Date - March 4, 2026 / 03:25 PM IST

नई दिल्ली: ईरान-अमेरिका युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ते भूराजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) के बीच भारतीय रुपया (Indian Rupee) डॉलर के मुकाबले अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया। बुधवार को रुपया पहली बार ₹92 के पार फिसल गया और कारोबार के दौरान लगभग ₹92.17 से ₹92.30 प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हुआ। यह अब तक का सबसे निचला स्तर माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल (crude oil) की कीमतों में तेज उछाल और वैश्विक निवेशकों की सुरक्षित माने जाने वाली अमेरिकी डॉलर (US Dollar) की ओर बढ़ती दिलचस्पी ने रुपये पर भारी दबाव बनाया है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ी है, जिसका सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है।

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर 82 से 85 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच गई हैं। भारत अपनी तेल जरूरतों का करीब 80 से 85 प्रतिशत आयात (import) करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से देश का आयात बिल (import bill) बढ़ेगा, जिससे चालू खाते का घाटा और महंगाई दोनों बढ़ने की आशंका है।

विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकालने की प्रक्रिया भी जारी है। इस पूंजी बहिर्वाह (capital outflow) ने रुपये की कमजोरी को और बढ़ाया है। बाजार विश्लेषकों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो रुपया ₹93 प्रति डॉलर के स्तर से भी नीचे जा सकता है।

आर्थिक जानकारों का मानना है कि कमजोर रुपया आयातित वस्तुओं की कीमतें बढ़ाएगा, जिससे घरेलू बाजार में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) बाजार में हस्तक्षेप कर सकता है। लेकिन वैश्विक हालात पर निर्भर करेगा कि रुपया आने वाले दिनों में स्थिर होता है या और गिरावट दर्ज करता है।