नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackery) को उस समय बड़ा झटका लगा, जब पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों के बगावत करने की खबरों ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी। सूत्रों के अनुसार बागी सांसदों के एक समूह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर अलग गुट के रूप में मान्यता और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय (Merger) की इच्छा जताई है।
जानकारी के मुताबिक बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को समर्थन संबंधी पत्र भी सौंपा है। माना जा रहा है कि यदि इन सांसदों को अलग समूह के रूप में मान्यता मिलती है तो यह उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है। रिपोर्टों के अनुसार ये सांसद जल्द ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट में शामिल हो सकते हैं।
दूसरी ओर शिवसेना (यूबीटी) नेतृत्व ने इन दावों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी नेता अरविंद सावंत, संजय राउत और अनिल देसाई ने भी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर एक पत्र सौंपा है। इसमें किसी भी संभावित अलग गुट को मान्यता नहीं देने की मांग की गई है। पार्टी का कहना है कि शिवसेना से जुड़े कई मामले अभी न्यायालय में लंबित हैं और ऐसे में किसी नए दावे को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
संजय राउत ने बगावत की खबरों को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने सभी सांसदों को बैठक में शामिल होने के लिए व्हिप जारी किया है और स्थिति जल्द स्पष्ट हो जाएगी। वहीं उद्धव ठाकरे ने भी संकेत दिए कि जो नेता पार्टी छोड़ना चाहते हैं, उन्हें रोका नहीं जाएगा।
इस घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि 6 सांसदों का समूह आधिकारिक रूप से अलग होता है तो इससे एकनाथ शिंदे गुट और NDA की संसदीय ताकत मजबूत होगी। वहीं उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) को एक और बड़े संगठनात्मक संकट का सामना करना पड़ सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम और बागी सांसदों की औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।