झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग का बड़ा खेल, NDA समर्थित परिमल नाथवानी की जीत से INDIA गठबंधन को झटका

राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में तीन प्रमुख उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें झामुमो के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी शामिल थे।

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  • Publish Date - June 18, 2026 / 08:18 PM IST

रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) ने बड़ा राजनीतिक उलटफेर कर दिया। NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज कर ली, जबकि झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बैजनाथ राम भी राज्यसभा पहुंचने में सफल रहे। इस परिणाम को INDIA गठबंधन (INDIA Bloc) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

राज्यसभा की दो सीटों के लिए हुए चुनाव में तीन प्रमुख उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें झामुमो के बैजनाथ राम, कांग्रेस के प्रणव झा और NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी शामिल थे। चुनाव से पहले सत्तारूढ़ INDIA गठबंधन दोनों सीटें जीतने का दावा कर रहा था, लेकिन नतीजों ने अलग तस्वीर पेश कर दी।

मतदान के बाद सामने आए परिणामों में परिमल नाथवानी को प्रथम वरीयता के 28 वोट मिले, जिससे उनकी जीत सुनिश्चित हो गई। वहीं झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम भी विजयी रहे। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम के बाद राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि परिमल नाथवानी की जीत बिना क्रॉस वोटिंग के संभव नहीं थी। चुनाव से पहले भी यह चर्चा थी कि NDA समर्थित उम्मीदवार की जीत की राह विपक्षी खेमे में संभावित क्रॉस वोटिंग से ही खुल सकती है।

इस चुनावी नतीजे को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और INDIA गठबंधन के लिए राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस उम्मीदवार को पर्याप्त समर्थन नहीं मिल पाया और गठबंधन अपनी एकजुटता बरकरार रखने में सफल नहीं दिखा। परिणाम आने के बाद विपक्षी खेमे में नाराजगी और आत्ममंथन का दौर शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।

राज्यसभा चुनाव के इस नतीजे ने झारखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। क्रॉस वोटिंग की भूमिका और गठबंधन दलों के भीतर समन्वय को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में प्रमुख चर्चा का विषय बना रह सकता है।