नवरात्रों में बोए जाने वाले जौ सोने के समान, जानें कैसे?

हिंदू धर्म में हर एक त्यौहार का अपना एक अलग महत्व है। वहीं साल में दो बार आने वाले नवरात्रों को भी भक्त बेहद ही श्रद्धा भाव के साथ मनाते हैं।

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  • Updated On - September 23, 2024 / 11:56 PM IST

नई दिल्ली, 23 सितंबर (आईएएनएस)। हिंदू धर्म में हर एक त्यौहार का अपना एक अलग महत्व है। वहीं साल में दो बार आने वाले नवरात्रों को भी भक्त बेहद ही श्रद्धा भाव के साथ मनाते हैं। यह शक्ति की उपासना का त्यौहार है और इसके जरिए देवी के नौ रूपों की कृपा और आशीर्वाद पाने के लिए हम अनुष्ठान और पूजा-पाठ करते हैं।

ऐसे में नवरात्र(Navratri) के पहले दिन घट स्थापना का विधान है और इस घट स्थापना के समय घट के नीचे मिट्टी और जौ के दाने डाले जाते हैं जिस पर कलश यानी घट को रखा जाता है। ये जौ नवरात्रि के नौ दिनों के अंदर कलश के नीचे रखे ये ज्वार के दानों में पौधे निकल आते हैं और मान्यता है कि ये पौधे जितने गहरे और घने होते हैं मां की कृपा से उस घर में उतनी ही शांति और समृद्धि आती है।

शारदीय नवरात्रि के पहले दिन भक्‍त मां की भक्ति करते हुए कलश स्थापना के साथ जौ भी उगाते हैं। मान्यता है कि नवरात्रों में जौ बोना बेहद ही शुभ और फल देने वाला माना जाता है।

नवरात्रि के पहले दिन जौ बोने का क्या महत्व है इस पर अधिक जानकारी के लिए आईएएनएस ने ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार परविंदर कौर जिंदल से बात की।

परविंदर कौर ने बताया,” नवरात्रि के 9 दिन हमें शक्ति प्रदान करते हैं। नवरात्रि की पूजा में मां की आराधना करने के लिए कई तरह की पूजा सामग्री का उपयोग किया जाता है उनमें से जौ उगना भी एक महत्वपूर्ण चीज है, इसके बिना नवरात्रि की पूजा को संपन्न नहीं माना जाता।”

उन्होंने आगे कहा, ”अगर शास्त्रों की मानें तो यह वैदिक धर्म में ही नहीं बल्कि पृथ्वी की रचना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मान्यता है कि जब ब्रह्मा जी ने पृथ्वी का निर्माण किया था तो सबसे पहली फसल जौ की बोई गई थी। शास्‍त्रों में जौ को ब्रह्म स्वरूप माना गया है।”

ज्योतिषी ने बताया, ”शास्त्रों में जौ को सोने के समान(barley is like gold) अनमोल माना गया है। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति सोना खरीदने के लिए समर्थ नहीं है, वह अपने मंदिर में एक मुट्ठी जौ रख ले तो वह भी सोने के समान ही फल देगा।”

जौ बोने के बारे में बताते हुए परविंदर कौर ने कहा, ”जौ बोने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि किसी अच्छी मिट्टी का चुनाव करें जो किसी स्वच्छ जगह की हो, ध्‍यान रखें कि वह काली मिट्टी नहीं होनी चहिए। इसके साथ ही जौ बोने के लिए शुभ मुहूर्त का भी ध्‍यान रखना जरूरी है। जौ के पात्र को मंदिर की उत्तर-पूर्व दिशा यानि ईशान कोण में रखना चाहिए, साथ ही इसमें नियमित तौर पर जल का छिड़काव करते रहना चाहिए।”

जौ बोने के बारे में और अधिक जानकारी देते हुए परविंदर कौर ने कहा कि जौ घर में खुशहाली लाने का काम करते हैं। अगर जौ 2 से 4 दिन में उग आते हैं तो यह उन्नति, समृद्धि और खुशहाली का संकेत होता है। ऐसे घर में कभी भी धन की कमी नहीं होती। वहीं अगर जौ 4 से 5 दिन में होते हैं तो इससे पता लगता है कि आपको अपने कार्य में अधिक मेहनत और परिश्रम करने की आवश्यकता है।”

नवरात्रि पूजा के बाद जौ का क्या करना चाहिए इस पर उन्होंने कहा, ”नवरात्रि के दसवें दिन सूर्योदय से पहले जौ को बहते पानी में प्रवाहित कर देना चाहिए, ध्यान रहे कि पात्र में से थोड़े से जौ निकालकर लाल कपड़े में बांधकर अपनी अपनी तिजोरी में रखें, इससे आपके घर में धन की कमी कभी नहीं होगी। आपके काम भी सुचारू रूप से होते जाएंगे।”