नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका (United States) और ईरान (Iran) के बीच हुए शांति समझौते (Peace Deal) का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि इससे पश्चिम एशिया (West Asia) में शांति और स्थिरता (Stability) बहाल होगी। उन्होंने कहा कि इस समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन से क्षेत्र में तनाव कम होगा और समुद्री मार्गों पर नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) सुनिश्चित होगी, जो वैश्विक व्यापार (Global Trade) और आपूर्ति श्रृंखलाओं (Supply Chains) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को इस समझौते पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान का समर्थक रहा है। उन्होंने आशा जताई कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी यह सहमति पूरे क्षेत्र में स्थायी शांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
अमेरिका और ईरान के बीच यह समझौता कई महीनों से जारी संघर्ष और तनाव को समाप्त करने की दिशा में बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। समझौते के तहत संघर्ष विराम, समुद्री मार्गों को फिर से खोलने और आगे की वार्ताओं के लिए रूपरेखा तैयार करने पर सहमति बनी है। रिपोर्टों के अनुसार, इससे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही सामान्य होने की उम्मीद है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। पिछले कुछ महीनों में क्षेत्रीय तनाव के कारण यहां व्यापारिक और ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा था, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता देखी गई थी।
भारत पहले भी कई बार पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर जोर देता रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने मार्च में ईरान के राष्ट्रपति से बातचीत के दौरान भी खुले और सुरक्षित शिपिंग मार्गों की आवश्यकता पर बल दिया था।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस समझौते का व्यापक स्वागत किया गया है। संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय देशों और कई अन्य वैश्विक नेताओं ने इसे क्षेत्रीय शांति और आर्थिक स्थिरता की दिशा में सकारात्मक कदम बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समझौते की सभी शर्तों को सफलतापूर्वक लागू किया गया तो इससे पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव कम होगा, ऊर्जा बाजारों को राहत मिलेगी और वैश्विक व्यापार को भी मजबूती मिलेगी।