नई दिल्ली: संसद के विशेष सत्र में गुरुवार को केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण (Women Reservation) और परिसीमन (Delimitation) से जुड़े अहम बिल लोकसभा (Lok Sabha) में पेश कर दिए। इन बिलों का उद्देश्य 2029 के आम चुनाव से संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण (33% quota) लागू करना है।
सरकार इस कदम के जरिए देश की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना चाहती है। यह प्रस्ताव लंबे समय से लंबित महिला आरक्षण को लागू करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
प्रस्तावित बिल के तहत लोकसभा की सीटों की संख्या बढ़ाने की भी योजना है, ताकि महिलाओं के लिए आरक्षण लागू किया जा सके। इसके लिए संविधान संशोधन किया जाएगा और परिसीमन प्रक्रिया के जरिए सीटों का पुनर्गठन किया जाएगा।
परिसीमन का मतलब है जनसंख्या के आधार पर चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करना। सरकार इस प्रक्रिया के जरिए नई सीटें जोड़कर महिलाओं के लिए एक-तिहाई हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाहती है।
बताया जा रहा है कि लोकसभा की कुल सीटें 543 से बढ़ाकर 800 से ज्यादा की जा सकती हैं, ताकि बिना किसी राज्य की मौजूदा सीटें घटाए महिला आरक्षण लागू किया जा सके।
हालांकि इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। विपक्षी दलों का कहना है कि महिला आरक्षण, परिसीमन और सीट बढ़ाने जैसे तीन अलग-अलग मुद्दों को एक साथ जोड़कर पेश किया जा रहा है, जिससे भ्रम पैदा हो रहा है।
कुछ विपक्षी नेताओं ने परिसीमन के तरीके पर भी सवाल उठाए हैं और इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह कदम महिलाओं को सशक्त बनाने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस विशेष सत्र के दौरान लोकसभा को संबोधित कर सकते हैं, जहां इन बिलों पर चर्चा और बहस होने की संभावना है।
यदि ये बिल पास हो जाते हैं, तो 2029 के आम चुनाव से देश की संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।