खरसिया मंगल कार्बन प्लांट में भीषण विस्फोट, 8 झुलसे, 9 महीने की मासूम बच्ची भी गंभीर

समाजसेवी राजेश त्रिपाठी का कहना है कि जिले में औद्योगिक सुरक्षा निरीक्षण अक्सर कागजों तक सीमित रहता है।

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  • Publish Date - February 5, 2026 / 09:01 PM IST

खरसिया, रायगढ़, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के रायगढ़ जिले के खरसिया थाना क्षेत्र के बानीपाथर स्थित मंगल कार्बन प्लांट (Mangal Carbon Plant) में गुरुवार सुबह एक भयंकर विस्फोट (Blast) हुआ, जिसमें एक 9 महीने की मासूम बच्ची समेत कुल 8 लोग बुरी तरह झुलस गए। यह हादसा औद्योगिक सुरक्षा (Industrial Safety) पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

घटना के समय प्लांट में पुराने टायर गलाकर ऑयल बनाने की प्रक्रिया चल रही थी। बताया गया कि मशीन का ढक्कन खोलते ही अचानक तेज धमाका हुआ, जिसके कारण आग और गर्म गैसें (Fire and Hot Gases) फैल गईं। इससे वहां काम कर रहे मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। झुलसे हुए लोगों में इंद्रजीत खड़िया, साहब राम (40), उसका बेटा शिव (28), इंद्रवद (19), प्रिया, उदासीन और मासूम भूमि शामिल हैं। सभी को गंभीर हालत में जिला अस्पताल रायगढ़ में भर्ती कराया गया। कई मरीजों को बेहतर इलाज के लिए अन्य अस्पतालों में रेफर किया गया।

प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि धमाका इतना तेज था कि आसपास खड़े मजदूर भी आग की चपेट में आ गए। कई मजदूर 70 से 80 प्रतिशत तक झुलस गए हैं। मुख्य चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल जगत ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए घायलों का उपचार प्राथमिकता के आधार पर किया जा रहा है।

हादसे के बाद प्लांट में अफरा-तफरी मच गई, लेकिन प्रबंधन ने मीडिया और अधिकारियों को स्पष्ट जानकारी देने से दूरी बनाए रखी। यह घटना प्रशासनिक और औद्योगिक सुरक्षा विभाग की घोर लापरवाही (Negligence) को भी उजागर करती है। विशेष रूप से, यह सवाल उठता है कि गर्म लोहा और ज्वलनशील पदार्थों के बीच छोटे बच्चों की मौजूदगी कैसे संभव हुई।

समाजसेवी राजेश त्रिपाठी का कहना है कि जिले में औद्योगिक सुरक्षा निरीक्षण अक्सर कागजों तक सीमित रहता है। अग्निशमन व्यवस्था की समीक्षा और मजदूरों के सुरक्षा प्रशिक्षण पर ध्यान नहीं दिया जाता, जिससे बार-बार हादसे सामने आते हैं।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी ने बताया कि घटना की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन, श्रम विभाग और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। हादसे के कारणों की जांच जारी है और जांच रिपोर्ट के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या इस बार जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई होगी या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा। मजदूरों की जान से खिलवाड़ करने वाले प्लांट प्रबंधन और लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाना अब समय की मांग बन गया है।