पीओके में पाकिस्तान के खिलाफ उबाल: महिलाओं और बच्चों के साथ सड़कों पर उतरे कश्मीरी, लगे ‘पाकिस्तानी सेना वापस जाओ’ के नारे

रिपोर्ट के मुताबिक इन प्रदर्शनों का नेतृत्व अवामी एक्शन कमेटी (AAC) कर रही है, जिसने पाकिस्तान सरकार के सामने 38 मांगों का चार्टर रखा है। संगठन ने सरकार को 23 जून तक मांगें मानने की समयसीमा दी है।

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  • Publish Date - June 22, 2026 / 10:46 PM IST

मुजफ्फराबाद (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर): पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में पाकिस्तान सरकार (Pakistan government) और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होता जा रहा है। सड़कों पर बड़ी संख्या में कश्मीरी नागरिक, महिलाएं (Women) और बच्चे (Children) उतर आए हैं और खुले तौर पर ‘पाकिस्तानी सेना वापस जाओ’ तथा ‘आजादी’ (Freedom) के नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तान सरकार और सेना क्षेत्र के लोगों के अधिकारों का दमन कर रही है और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक इन प्रदर्शनों का नेतृत्व अवामी एक्शन कमेटी (AAC) कर रही है, जिसने पाकिस्तान सरकार के सामने 38 मांगों का चार्टर रखा है। संगठन ने सरकार को 23 जून तक मांगें मानने की समयसीमा दी है। प्रदर्शन अब केवल कुछ इलाकों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि मुजफ्फराबाद, रावलाकोट, गिलगित-बाल्टिस्तान, दादियाल, सुधनोती और अन्य क्षेत्रों तक फैल चुके हैं।

पिछले कुछ हफ्तों में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए हैं। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार हालिया हिंसा में मृतकों की संख्या 58 तक पहुंच गई है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारी पाकिस्तान सेना पर निहत्थे नागरिकों के खिलाफ बल प्रयोग करने का आरोप लगा रहे हैं।

रावलाकोट में हजारों लोग एकत्र हुए और पाकिस्तान के कब्जे तथा नीतियों के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे लोकतांत्रिक अधिकार, बेहतर प्रतिनिधित्व, महंगाई से राहत, सस्ती बिजली, सस्ता आटा और स्थानीय संसाधनों पर स्थानीय लोगों के अधिकार की मांग कर रहे हैं। कई जगह बाजार भी बंद रहे और लोगों ने हड़ताल का समर्थन किया।

मानवाधिकार संगठनों ने भी पीओके में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने पाकिस्तान से संयम बरतने और नागरिकों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है। वहीं प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।