ईरानी तेल पर US ने हटाए प्रतिबंध: 30 दिन में बाजार में आएंगे 140 मिलियन बैरल, मिडिल ईस्ट संकट के बीच बड़ा फैसला

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेल एशियाई देशों तक 3 से 4 दिनों में पहुंच सकता है और 30 से 45 दिनों के भीतर बाजार में पूरी तरह शामिल हो जाएगा।

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  • Publish Date - March 21, 2026 / 12:32 PM IST

वाशिंगटन : मिडिल ईस्ट (Middle East) में बढ़ते युद्ध (War) और वैश्विक तेल संकट (Global Oil Crisis) के बीच अमेरिका (USA) ने बड़ा कदम उठाते हुए समुद्र (Sea) में फंसे ईरानी तेल (Iranian Oil) पर लगे प्रतिबंध (Sanctions) को 30 दिनों के लिए हटा दिया है। इस फैसले का मकसद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई (Supply) बढ़ाना और तेजी से बढ़ रही तेल की कीमतों (Oil Prices) को नियंत्रित करना है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार यह छूट केवल उस ईरानी तेल पर लागू होगी जो पहले से जहाजों में समुद्र में मौजूद है। नए तेल उत्पादन या खरीद की अनुमति नहीं दी गई है। इस फैसले से करीब 140 मिलियन बैरल तेल वैश्विक बाजार में आ सकता है, जिससे सप्लाई में सुधार होने की उम्मीद है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेल एशियाई देशों तक 3 से 4 दिनों में पहुंच सकता है और 30 से 45 दिनों के भीतर बाजार में पूरी तरह शामिल हो जाएगा। इससे खासकर चीन जैसे बड़े खरीदारों को फायदा मिल सकता है।

दरअसल, 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए अमेरिका-ईरान-इजराइल तनाव के कारण होरमुज़ जलडमरूमध्य लगभग बंद हो गया है, जिससे दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई प्रभावित हुई है। इस वजह से तेल की कीमतें करीब 50 प्रतिशत तक बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं।

अमेरिका का यह कदम पिछले कुछ हफ्तों में तीसरी बार है जब उसने तेल बाजार को स्थिर करने के लिए प्रतिबंधों में ढील दी है। इससे पहले रूस के तेल पर भी इसी तरह की अस्थायी छूट दी जा चुकी है।

हालांकि इस फैसले को लेकर आलोचना भी हो रही है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ईरान को अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ मिल सकता है, जबकि अमेरिका का कहना है कि ईरान इस तेल से मिलने वाली कमाई तक पूरी तरह पहुंच नहीं बना पाएगा।

विश्लेषकों के अनुसार यह सिर्फ अस्थायी समाधान है और जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, तब तक तेल की कीमतों में स्थिरता आना मुश्किल रहेगा।