इंदौर में दूषित पानी से 15वीं मौत एनएचआरसी सख्त आज हाईकोर्ट में सुनवाई
By : hashtagu, Last Updated : January 2, 2026 | 12:36 pm
इंदौर: इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से फैल रही बीमारी ने एक और जान ले ली है। इस मामले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। मृत महिला की पहचान 68 वर्षीय गीताबाई के रूप में हुई है। अब तक 16 बच्चों सहित 201 लोग अलग अलग अस्पतालों में भर्ती हैं। सभी मौतें गंदा और बैक्टीरिया युक्त पानी पीने के कारण होने की पुष्टि हो चुकी है।
महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट में यह साफ हुआ है कि इलाके के पेयजल में खतरनाक बैक्टीरिया मौजूद थे। सीएमएचओ डॉ माधव हसानी ने बताया कि जांच रिपोर्ट से स्पष्ट है कि दूषित पानी पीने से लोग बीमार पड़े और उनकी जान गई। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट और कल्चर टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर स्पष्ट जानकारी दी जा सकेगी।
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी स्वीकार किया है कि भागीरथपुरा की पानी की लाइन में सीवेज का पानी मिल गया था। उन्होंने आशंका जताई कि चौकी के पास पाइपलाइन में लीकेज के कारण यह स्थिति बनी। इसी लीकेज से गंदा पानी पीने की लाइन में पहुंचा और लोगों की तबीयत बिगड़ी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया है। एनएचआरसी ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने पूछा है कि दूषित पानी की आपूर्ति कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई की गई।
इस पूरे मामले पर आज हाईकोर्ट में भी सुनवाई संभावित है। जबलपुर की दो सदस्यीय बेंच ऑनलाइन सुनवाई करेगी। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। हालांकि शासन की ओर से पेश जवाब में अब तक केवल चार मौतों का ही उल्लेख किया गया है जिस पर कोर्ट सवाल उठा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार ड्रेनेज के पानी में मौजूद बैक्टीरिया जैसे हैजा शिगेला सैल्मोनेला और ई कोलाई बेहद खतरनाक होते हैं। जब यह सीवेज पानी पीने की लाइन में मिल जाता है तो स्थिति और अधिक जानलेवा हो जाती है। भागीरथपुरा में भी इसी तरह का संक्रमण फैलने की आशंका जताई जा रही है।
गुरुवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के भागीरथपुरा दौरे के दौरान लोगों का गुस्सा भी देखने को मिला। मृतकों के परिजनों को मुआवजे के चेक दिए जा रहे थे लेकिन कई परिवारों ने चेक लेने से इनकार कर दिया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि पिछले दो साल से गंदा पानी आ रहा था लेकिन शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं किया गया।
अस्पतालों में भर्ती मरीजों के परिजन भी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं। एक महिला ने बताया कि उसकी बुजुर्ग सास की हालत गंभीर है और अस्पताल में इलाज के लिए पैसे मांगे जा रहे हैं। परिजनों का कहना है कि मुआवजा नहीं बल्कि जिम्मेदारों पर कार्रवाई और सुरक्षित पानी की व्यवस्था चाहिए।
सीएमएचओ के अनुसार अब तक 1714 घरों का सर्वे किया जा चुका है और 8571 लोगों की जांच की गई है। 338 मरीजों को मौके पर प्राथमिक उपचार दिया गया। कुल 272 मरीज अस्पताल में भर्ती किए गए थे जिनमें से 71 को छुट्टी दी जा चुकी है। फिलहाल 201 मरीज भर्ती हैं जिनमें 32 की हालत गंभीर बनी हुई है और वे आईसीयू में इलाजरत हैं।




