इंदौर में पानी पर सियासी बवाल, 90% सैंपल फेल होने का दावा, जीतू पटवारी बोले- ‘स्वच्छ नहीं संक्रमित शहर’
By : hashtagu, Last Updated : May 29, 2026 | 4:54 pm
इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर (Clean City) कहे जाने वाले इंदौर में अब दूषित पानी (Contaminated Water) को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (MP Congress President) जीतू पटवारी ने दावा किया है कि शहर में सप्लाई हो रहे पानी के 90 प्रतिशत से ज्यादा सैंपल जांच में फेल पाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इंदौर अब “सबसे स्वच्छ शहर” नहीं बल्कि “सबसे संक्रमित शहर” बनता जा रहा है।
इंदौर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जीतू पटवारी ने कहा कि अगर हालात नहीं सुधरे तो भागीरथपुरा जैसा बड़ा हादसा फिर हो सकता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने दो महीने तक शहर के अलग-अलग इलाकों से पानी के सैंपल जुटाए। इसके लिए लाइव लैब वैन चलाई गई और कुछ नमूनों को दिल्ली की माइक्रोबायोलॉजिकल लैब में भी जांच के लिए भेजा गया। कांग्रेस का दावा है कि करीब 240 से 300 पानी के सैंपलों में से 90 फीसदी से ज्यादा दूषित पाए गए।
पटवारी ने दावा किया कि पानी में खतरनाक बैक्टीरिया और जहरीले तत्व मिले हैं, जो गंभीर बीमारी और मौत तक का कारण बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि शहर के गरीब इलाकों से लेकर पॉश कॉलोनियों और सरकारी अस्पतालों तक पानी की गुणवत्ता खराब मिली है। यहां तक कि महापौर के क्षेत्र सुदामा नगर में भी पानी के नमूने फेल पाए गए।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को भागीरथपुरा जल त्रासदी से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। भागीरथपुरा में दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 के दौरान दूषित पानी पीने से कई लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग बीमार पड़े थे। जांच में सामने आया था कि सीवर का पानी पाइपलाइन में मिल गया था, जिससे पूरे इलाके में उल्टी-दस्त फैल गए थे।
जीतू पटवारी ने बीजेपी सरकार, नगर निगम और प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव, नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नगर निगम प्रशासन को इस मामले की जवाबदेही लेनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब लगातार शिकायतें मिल रही थीं तो पानी की गुणवत्ता की गंभीर जांच क्यों नहीं कराई गई।
वहीं, इंदौर प्रशासन और बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस के दावों को डर फैलाने की राजनीति बताया है। इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कांग्रेस को खुली बहस की चुनौती देते हुए कहा कि शहर की जल व्यवस्था को लेकर गलत जानकारी फैलाकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
भागीरथपुरा जल कांड की जांच के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में आयोग भी जांच कर रहा है। रिपोर्ट जून में पेश की जानी है। इस बीच दूषित पानी और खराब पाइपलाइन को लेकर इंदौर में सियासत और तेज हो गई है।




