रायपुर, छत्तीसगढ़। राज्य में पहली बार 120 पूर्व नक्सलियों (surrendered Naxalites) ने हथियार छोड़कर लोकतांत्रिक व्यवस्था (democratic system) को करीब से समझने के लिए छत्तीसगढ़ विधानसभा की कार्यवाही देखी। ये सभी वे लोग हैं जिन्होंने नक्सल संगठन छोड़कर सरेंडर (surrender) किया है और अब पुनर्वास (rehabilitation) योजना के तहत सामान्य जीवन की ओर लौट रहे हैं। इनमें कई बड़े इनामी पूर्व नक्सली भी शामिल रहे हैं, जिन पर पहले लाखों और करोड़ों रुपये का इनाम घोषित था।
सदन की कार्यवाही देखने से पहले सभी पूर्व नक्सलियों की सुरक्षा जांच की गई। इसके बाद उन्हें दर्शक दीर्घा में बैठाकर विधानसभा की प्रश्नकाल और अन्य चर्चाओं की प्रक्रिया दिखाई गई। इस दौरान उन्हें बताया गया कि किस तरह जनप्रतिनिधि जनता के मुद्दे उठाते हैं और सरकार जवाब देती है। कई पूर्व नक्सलियों ने पहली बार विधानसभा भवन देखा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझा।
गन से गूँज तक — अब जयघोष है भारत माता की जय🇮🇳 pic.twitter.com/GBAGxc17bZ
— Vijay sharma (@vijaysharmacg) February 27, 2026
इससे पहले सभी को डिनर पर आमंत्रित किया गया था, जहां उनकी मुलाकात मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा से हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, सरकार उन्हें सुरक्षा, रोजगार और सम्मानजनक जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है। उपमुख्यमंत्री ने भी कहा कि राज्य में शांति स्थापित करने के लिए पुनर्वास नीति को मजबूती से लागू किया जा रहा है।
सरकार का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से नक्सल प्रभावित इलाकों में विश्वास बढ़ेगा और अन्य सक्रिय नक्सली भी सरेंडर के लिए आगे आएंगे। विधानसभा की कार्यवाही देखने के बाद कई पूर्व नक्सलियों ने कहा कि अब वे लोकतंत्र के जरिए अपनी बात रखने और समाज के विकास में योगदान देने के लिए तैयार हैं।
आज छत्तीसगढ़ ने ऐतिहासिक क्षण देखा।
जो कभी गनतंत्र को ही अपनी राह मानते थे, आज वही संविधान की सर्वोच्चता को स्वीकार करते हुए लोकतंत्र के मंदिर “विधानसभा” की कार्यवाही देखने पहुँचे।
यह केवल विधानसभा भ्रमण नहीं था, बल्कि विचारों का परिवर्तन था। यह संदेश था कि बंदूक की जगह संवाद… pic.twitter.com/3AxqbkSLET
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