भोपाल: मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन (Meenakshi Natarajan) का नामांकन खारिज होना केवल एक तकनीकी प्रक्रिया नहीं रहा, बल्कि इसके पीछे दो राज्यों की राजनीति, कानूनी रणनीति और अंदरूनी सूचनाओं का बड़ा खेल सामने आया है। इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां बीजेपी इसे नियमों और पारदर्शिता की जीत बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर हमला और राजनीतिक साजिश करार दे रही है।
इस मामले की सबसे अहम कड़ी तेलंगाना से जुड़े उन दस्तावेजों को माना जा रहा है, जिन्होंने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को चुनौती देने का आधार तैयार किया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि ये दस्तावेज तेलंगाना से भोपाल पहुंचे और नामांकन जांच के दौरान निर्णायक साबित हुए।
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मामले पर टिप्पणी करते हुए कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि बीजेपी को जो दस्तावेज मिले, वे ऐसे राज्य से आए जहां कांग्रेस की सरकार है। इससे यह सवाल खड़ा होता है कि जानकारी पार्टी के भीतर से ही बाहर आई होगी। हालांकि बीजेपी सूत्रों के अनुसार दस्तावेज किसी आंतरिक लीक का परिणाम नहीं थे, बल्कि एक राजनीतिक और संगठनात्मक चैनल के माध्यम से मध्य प्रदेश बीजेपी तक पहुंचाए गए।
सूत्रों के मुताबिक तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष रामचंदर राव ने मीनाक्षी नटराजन से जुड़े अदालती मामलों और कानूनी नोटिसों की पूरी फाइल मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भेजी थी। यह फाइल सोमवार को भोपाल पहुंची, जिसके बाद राज्य बीजेपी नेतृत्व ने तुरंत सक्रियता दिखाई।
बताया जाता है कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने दस्तावेज मिलने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पूरे मामले की जानकारी दी। इसके बाद पार्टी की कानूनी टीम को नामांकन प्रक्रिया की जांच और आपत्ति दर्ज कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई। नामांकन की स्क्रूटनी के दौरान बीजेपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राहुल कोठारी और सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज रोहित आर्य ने पक्ष रखा। करीब साढ़े चार घंटे चली कानूनी बहस के दौरान प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर कांग्रेस उम्मीदवार के नामांकन पर गंभीर सवाल खड़े किए गए।
इस पूरे विवाद की जड़ वर्ष 2022 के एक पुराने मामले में बताई जा रही है। यह मामला तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद से जुड़ा है, जहां एक महिला, जो पहले कॉरपोरेट क्षेत्र में कार्यरत रही हैं, ने कांग्रेस नेता कुनम शिवा कुमार रेड्डी पर छेड़छाड़ और धमकी देने के आरोप लगाए थे। महिला का आरोप था कि शिकायत किए जाने के बावजूद कांग्रेस संगठन ने अपने नेता के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
इसी मामले से जुड़े कानूनी दस्तावेज और नोटिस बाद में मीनाक्षी नटराजन के नामांकन की जांच के दौरान चर्चा में आए। बीजेपी का दावा है कि नामांकन पत्र में आवश्यक जानकारियों और कानूनी तथ्यों के खुलासे को लेकर गंभीर प्रश्न थे, जबकि कांग्रेस का कहना है कि पूरे मामले का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया गया और एक मजबूत उम्मीदवार को चुनावी दौड़ से बाहर करने की कोशिश की गई।
नामांकन खारिज होने के बाद राज्यसभा चुनाव का राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गया है। कांग्रेस को जहां बड़ा झटका लगा है, वहीं बीजेपी इसे अपनी कानूनी और राजनीतिक रणनीति की सफलता के रूप में पेश कर रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस और तेज होने की संभावना है।