छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर बाघ की खाल तस्करी का भंडाफोड़, दो तस्कर गिरफ्तार, दो खाल बरामद

वन विभाग को तस्करी की गुप्त सूचना मिलने के बाद विशेष टीम ने छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर निगरानी बढ़ाई।

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  • Publish Date - July 1, 2026 / 02:39 PM IST

रायपुर। छत्तीसगढ़ वन विभाग ने वन्यजीव तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर अंतरराज्यीय बाघ की खाल (Tiger Skin) तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान महाराष्ट्र के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि उनके कब्जे से बाघ की दो खाल बरामद की गई हैं। यह कार्रवाई कांकेर जिले के पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल के बांदे रेंज में की गई।

वन विभाग को तस्करी की गुप्त सूचना मिलने के बाद विशेष टीम ने छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर निगरानी बढ़ाई। इसी दौरान मोटरसाइकिल से बाघ की खाल लेकर जा रहे दो आरोपियों को घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले के निवासी बयेश्वर और बाबूराव के रूप में हुई है। दोनों के कब्जे से बाघ की दो खाल जब्त की गई।

इस संयुक्त अभियान में वन विभाग के साथ वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB) की उत्तरी और मध्य क्षेत्रीय टीम, उड़ंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की एंटी-पोचिंग यूनिट, फ्लाइंग स्क्वाड और स्थानीय वन अमले ने हिस्सा लिया। अधिकारियों ने बताया कि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय और खुफिया जानकारी के आधार पर यह कार्रवाई सफल रही।

वन मंत्री केदार कश्यप ने इस कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता बताया। वहीं प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स अरुण कुमार पांडे के नेतृत्व में विभाग ने इसे संगठित वन्यजीव तस्करी के खिलाफ अहम उपलब्धि बताया है। बाघ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में शामिल संरक्षित प्रजाति है और इसकी तस्करी गंभीर अपराध की श्रेणी में आती है।

दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वन विभाग अब इस मामले को केवल दो आरोपियों तक सीमित नहीं मान रहा है। जांच का दायरा बढ़ाते हुए पूरे तस्करी नेटवर्क, शिकारियों और फंडिंग से जुड़े लोगों की पहचान की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।