छत्तीसगढ़ में नक्सलियों का अंत करीब? कांकेर में 6 माओवादी सरेंडर की तैयारी, 31 मार्च डेडलाइन पर तेज हुई कार्रवाई
By : hashtagu, Last Updated : March 26, 2026 | 3:46 pm
कांकेर, छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद (Naxalism), आत्मसमर्पण (Surrender) और सुरक्षा अभियान (Security Operation) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। राज्य में नक्सलियों के सफाए के लिए अब सिर्फ 5 दिन बचे हैं और इसी बीच कांकेर जिले में 6 माओवादियों के सरेंडर करने की खबर है। बताया जा रहा है कि इनमें से 5 नक्सली एक SLR और दो 303 रायफल के साथ आत्मसमर्पण करने के लिए निकल चुके हैं।
बुधवार को 17 नक्सलियों के एक साथ सरेंडर के बाद यह कार्रवाई और तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने छत्तीसगढ़ से नक्सलियों के पूरी तरह सफाए के लिए 31 मार्च 2026 की समयसीमा तय की है। इस बीच कुख्यात नक्सली पापा राव ने भी अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर इस अभियान को बड़ा बल दिया है।
जानकारी के मुताबिक सरेंडर करने वाले नक्सलियों में ACM मंगेश, ACM गणेश उइका, ACM राजे, ACM हिड़मे उर्फ जमाली और ACM मंगति शामिल हैं। वहीं महिला नक्सली स्वरूपा पहले ही पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर चुकी है। इन नक्सलियों के सरेंडर के बाद मोहला-मानपुर क्षेत्र की अवन्धी संयुक्त एरिया कमेटी को पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित किया जा रहा है।
राज्य में नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत दंतेवाड़ा जिले में माओवादियों की दरभा डिवीजन को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है। दावा किया जा रहा है कि दंतेवाड़ा में अब एक भी माओवादी सक्रिय नहीं बचा है। पिछले दो वर्षों में यहां तेजी से सड़क और विकास कार्य हुए हैं, जिससे नक्सल गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ा है।
सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली अब मुख्यधारा में लौट रहे हैं। दंतेवाड़ा के लिवलीहुड कॉलेज में पूर्व नक्सली स्किल डेवलपमेंट के जरिए नई जिंदगी शुरू कर रहे हैं। महिला नक्सली सिलाई, हथकरघा और इलेक्ट्रिशियन का काम सीख रही हैं, जबकि पुरुष नक्सली ड्राइविंग, राजमिस्त्री, वेल्डिंग और प्लंबिंग का प्रशिक्षण ले रहे हैं।
आंकड़ों के अनुसार दंतेवाड़ा जिले में अब तक 1659 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 1720 की गिरफ्तारी हुई है। अलग-अलग मुठभेड़ों में 260 माओवादी मारे गए हैं। इन अभियानों में 335 जवान शहीद हुए हैं, जबकि 351 ग्रामीणों की भी नक्सली हिंसा में मौत हुई है।
पापा राव के सरेंडर के बाद अब छत्तीसगढ़ में बड़े नक्सली नेताओं की संख्या काफी कम हो गई है। फिलहाल हेमला बिच्चा, सोढ़ी केशा और महिला नक्सल लीडर रूपी ही बड़े सक्रिय चेहरे माने जा रहे हैं। इनमें से हेमला बिच्चा और सोढ़ी केशा बीजापुर-तेलंगाना सीमा के जंगलों में सक्रिय हैं, जबकि रूपी कांकेर और आसपास के इलाकों में मौजूद बताई जा रही है।
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