गरियाबंद हिंसा की इनसाइड स्टोरी: मंदिर में तोड़फोड़ से आगजनी तक, कलेक्टर ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

कलेक्टर के आदेश के अनुसार राजिम के अनुविभागीय दंडाधिकारी विशाल महाराणा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है।

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  • Publish Date - February 8, 2026 / 06:22 PM IST

गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले (Gariyabandh) के राजिम थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम दुतकैया (खपरी) में हुई हिंसा ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। मंदिर में तोड़फोड़ से शुरू हुआ विवाद आगजनी और हिंसा तक पहुंच गया। हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर सौंपनी होगी, जिसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हिंसा किन कारणों से भड़की और इसमें कौन-कौन जिम्मेदार हैं।

कलेक्टर के आदेश के अनुसार राजिम के अनुविभागीय दंडाधिकारी विशाल महाराणा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें घटना की विस्तृत, तथ्यात्मक और बिंदुवार रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में हिंसा के कारण, जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका, हुए संपत्ति नुकसान और प्रशासन को पूर्व में मिली किसी चेतावनी या सूचना की भी समीक्षा की जाएगी।

घटना के बाद गांव में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और शांति बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। किसी भी नई घटना को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

इस विवाद की जड़ करीब एक साल पुरानी बताई जा रही है। ग्रामीणों के अनुसार गांव के एक पुराने शिव मंदिर में आरिफ, सलीम और इमरान नाम के तीन युवकों ने शिवलिंग में तोड़फोड़ की थी। उस समय तीनों नाबालिग थे, जिसके चलते उन्हें बाल सुधार गृह भेजा गया था।

ग्रामीणों का आरोप है कि सुधार गृह से लौटने के बाद इन युवकों के व्यवहार में सुधार नहीं हुआ, बल्कि वे आक्रामक हो गए। गांव में धमकी देने और हथियार दिखाकर डराने की घटनाओं के चलते लंबे समय से तनाव बना हुआ था।

1 फरवरी को यह तनाव हिंसा में बदल गया। आरोप है कि तीनों युवकों ने अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर गांव के 4-5 युवकों पर हमला किया, जिसमें एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद गांव में आक्रोश फैल गया।

हमले और पुरानी रंजिश के बाद सैकड़ों ग्रामीण उग्र हो गए। भीड़ ने आरोपियों के घरों के साथ-साथ उनके समुदाय के अन्य लोगों के घरों को भी निशाना बनाया। कई स्थानों पर तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं, जिससे गांव का माहौल पूरी तरह बिगड़ गया।

अब कलेक्टर द्वारा आदेशित मजिस्ट्रियल जांच से यह तय होगा कि प्रशासनिक स्तर पर कहां चूक हुई और क्या समय रहते हालात को संभाला जा सकता था। 15 दिन बाद आने वाली रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई तय की जाएगी।