कौन हैं लक्ष्मी वर्मा? पार्षद से भाजपा की राज्यसभा उम्मीदवार बनने तक का राजनीतिक सफर

लक्ष्मी वर्मा मूल रूप से छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के सिमगा ब्लॉक के मुड़पार गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने 1990 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता लेकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी

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  • Publish Date - March 5, 2026 / 03:53 PM IST

रायपुर, छत्तीसगढ़: भारतीय जनता पार्टी (BJP – Bharatiya Janata Party) ने राज्यसभा चुनाव 2026 (Rajya Sabha Election 2026) के लिए छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है। 55 वर्षीय लक्ष्मी वर्मा लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय रही हैं और जमीनी स्तर से राजनीति करते हुए उन्होंने तीन दशक से अधिक का अनुभव हासिल किया है। भाजपा नेतृत्व ने उनके नाम पर सहमति बनाते हुए उन्हें राज्यसभा के लिए मैदान में उतारा है।

लक्ष्मी वर्मा मूल रूप से छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के सिमगा ब्लॉक के मुड़पार गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने 1990 में भाजपा की प्राथमिक सदस्यता लेकर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की थी। इसके बाद 1994 में रायपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 7 से पार्षद चुनी गईं और यहीं से उनका सक्रिय राजनीतिक सफर शुरू हुआ।

साल 2000 में उन्हें रायपुर लोकसभा क्षेत्र के सांसद रमेश बैस का प्रतिनिधि बनाया गया, जिसके बाद पार्टी और संगठन में उनकी सक्रियता लगातार बढ़ती गई। वर्ष 2010 में वे रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष बनीं। इसके अलावा पार्टी संगठन में भी उन्हें कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं।

लक्ष्मी वर्मा 2021 में भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष भी रह चुकी हैं और उन्होंने पार्टी की मीडिया प्रवक्ता के रूप में भी काम किया। बाद में 2024 में उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य नियुक्त किया गया। संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहने और महिला वर्ग में मजबूत पकड़ होने के कारण पार्टी ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है।

सामाजिक पृष्ठभूमि की बात करें तो लक्ष्मी वर्मा कुर्मी समाज से आती हैं, जो ओबीसी वर्ग में प्रभावशाली माना जाता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार भाजपा ने महिला प्रतिनिधित्व और सामाजिक संतुलन दोनों को ध्यान में रखते हुए उन्हें उम्मीदवार बनाया है।

छत्तीसगढ़ विधानसभा में कुल 90 विधायक हैं और राज्यसभा चुनाव जीतने के लिए 31 वोटों की जरूरत होती है। वर्तमान में भाजपा के पास 54 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के पास 35 विधायक हैं। ऐसे में राजनीतिक समीकरणों के अनुसार दोनों प्रमुख दलों के एक-एक सीट जीतने की संभावना जताई जा रही है।