मोहन यादव परिवार की 168 एकड़ जमीन खरीद पर सियासी घमासान, उज्जैन के भूमि सौदों को लेकर जांच की मांग तेज

रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2023 में मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद से उनके परिवार और परिवार से जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन में कम से कम 137 प्लॉट खरीदे हैं।

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  • Publish Date - June 24, 2026 / 12:17 AM IST

उज्जैन (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार की जमीन खरीद को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। एक मीडिया रिपोर्ट के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा खरीदी गई जमीनों को लेकर जांच (Investigation), भूमि सौदे (Land Deals) और हितों के टकराव (Conflict of Interest) जैसे सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष ने मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2023 में मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद से उनके परिवार और परिवार से जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन में कम से कम 137 प्लॉट खरीदे हैं। इन जमीनों का कुल रकबा करीब 168 एकड़ बताया गया है, जबकि इनकी अनुमानित कीमत लगभग 45 करोड़ रुपये बताई जा रही है। आरोप है कि इनमें से अधिकांश जमीनें उन इलाकों में खरीदी गईं, जहां राज्य सरकार द्वारा सड़क परियोजनाएं, आधारभूत ढांचा विकास और भूमि उपयोग परिवर्तन की घोषणाएं की गई थीं।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि खरीदी गई 168 एकड़ जमीन में से लगभग 111 एकड़ भूमि ऐसे क्षेत्रों में स्थित है, जो नई सड़क परियोजनाओं या उज्जैन मास्टर प्लान के तहत आवासीय और व्यावसायिक विकास के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। बताया गया है कि इन जमीनों की खरीद परिवार के विभिन्न सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों के माध्यम से की गई।

कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में “डबल इंजन” सरकार की जगह “लूट का इंजन” चल रहा है। पार्टी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से जवाब मांगा है और पूरे मामले की स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच कराने की मांग की है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार द्वारा बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सत्ता से जुड़े लोगों को कारोबार और भूमि खरीद में विशेष लाभ मिल रहा है। कांग्रेस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि सभी तथ्यों का खुलासा हो सके।

विवाद ऐसे समय सामने आया है जब उज्जैन में बड़े स्तर पर आधारभूत ढांचा विकास, सड़क निर्माण और शहरी विस्तार की योजनाएं चल रही हैं। विपक्ष का आरोप है कि विकास परियोजनाओं की घोषणा के बाद संबंधित क्षेत्रों में जमीनों की खरीद की गई, जिससे हितों के टकराव की आशंका पैदा होती है। हालांकि, इस मामले में मुख्यमंत्री या उनके परिवार की ओर से आरोपों पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मामले को लेकर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है और विपक्ष लगातार जांच की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद बन सकता है।