मध्य प्रदेश, धार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (High Court) ने लंबे समय से विवादित भोजशाला (Bhojshala) परिसर को देवी वाग्देवी यानी मां सरस्वती का मंदिर (Temple) माना है। कोर्ट ने अपने अहम फैसले में 2003 के उस एएसआई (ASI) आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को परिसर में नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने यह भी सुझाव दिया कि मुस्लिम समुदाय को मस्जिद (Mosque) के लिए दूसरी जगह जमीन उपलब्ध कराई जा सकती है।
इंदौर बेंच की जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने भोजशाला- कमाल मौला मस्जिद विवाद से जुड़े छह मामलों पर सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। अदालत ने 12 मई को सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रखा था।
भोजशाला परिसर धार जिले में स्थित एएसआई संरक्षित स्मारक है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता आया है। जैन समुदाय की ओर से भी दावा किया गया था कि यह मध्यकालीन जैन मंदिर और गुरुकुल रहा है।
मामले की सुनवाई के दौरान एएसआई ने कोर्ट को अपनी 98 दिन की वैज्ञानिक जांच और 2000 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट सौंपी थी। एएसआई ने कहा था कि मौजूदा ढांचा प्राचीन मंदिरों के अवशेषों से बना है और यहां परमार काल का विशाल मंदिरनुमा ढांचा मौजूद था।
मध्य प्रदेश सरकार ने भी कोर्ट में दायर जवाब में कहा था कि भोजशाला कभी मस्जिद नहीं थी और मुस्लिम समुदाय को नमाज की अनुमति केवल सांप्रदायिक तनाव रोकने के लिए दी गई थी। सरकार ने दावा किया था कि परिसर में हिंदू देवी-देवताओं के स्पष्ट चिन्ह मौजूद हैं।
मुस्लिम पक्ष ने अदालत में कहा था कि पुराने राजस्व रिकॉर्ड में इस स्थल को मस्जिद के रूप में दर्ज किया गया है। साथ ही 1935 के धार स्टेट के आदेश का भी हवाला दिया गया था, जिसमें परिसर को मस्जिद बताया गया था।
भोजशाला विवाद कई दशकों से धार्मिक और कानूनी बहस का केंद्र रहा है। अब हाईकोर्ट के इस फैसले को मामले में बड़ा मोड़ माना जा रहा है। हालांकि फैसले के बाद आगे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।