नई दिल्ली: पेट्रोल-डीजल (Petrol-Diesel) की कीमतों में जल्द बढ़ोतरी (Price Hike) हो सकती है। सरकार (Government) के सूत्रों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगातार उछाल और लंबे समय से स्थिर खुदरा दरों (Retail Rates) के चलते यह फैसला लिया जा सकता है।
सरकारी सूत्रों ने जानकारी दी है कि देश में पेट्रोल और डीजल के दाम पिछले लगभग चार साल से स्थिर रखे गए हैं, जबकि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली है। इस अंतर के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर वित्तीय दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
बताया जा रहा है कि हाल ही में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी और अभी भी यह 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका को इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है, जो दुनिया के प्रमुख तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है।
सूत्रों के मुताबिक तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल और डीजल की बिक्री पर भारी नुकसान झेल रही हैं। लागत बढ़ने के बावजूद उपभोक्ताओं के लिए कीमतें नहीं बढ़ाई गईं, जिससे कंपनियों के घाटे में लगातार इजाफा हो रहा है।
हालांकि, सरकार की ओर से पहले यह कहा गया था कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का कोई तत्काल प्रस्ताव नहीं है और आम जनता को राहत देने के लिए दरों को स्थिर रखा गया है। लेकिन मौजूदा हालात और अंतरराष्ट्रीय बाजार के दबाव को देखते हुए आने वाले समय में कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।
इस बीच तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय लागत के अनुसार कमर्शियल एलपीजी, औद्योगिक डीजल और विमान ईंधन की कीमतों में पहले ही इजाफा कर दिया है। इससे संकेत मिल रहे हैं कि यदि हालात ऐसे ही बने रहे तो आम उपभोक्ताओं को भी जल्द ही महंगे पेट्रोल-डीजल का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो सरकार के पास पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। इसका सीधा असर महंगाई पर पड़ेगा और आम जनता की जेब पर अतिरिक्त बोझ बढ़ सकता है।