सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से कहा—लापता बच्चों के पीछे देशव्यापी नेटवर्क की जांच करें

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि इन घटनाओं के बीच कोई समान पैटर्न या संगठन है या ये अलग-अलग, बेतरतीब घटनाएं हैं

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  • Publish Date - February 10, 2026 / 08:35 PM IST

नई दिल्ली, 10 फरवरी 2026: सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से निर्देश दिया है कि देशभर में लगातार बढ़ रहे लापता बच्चों (missing children) के मामलों के पीछे किसी देशव्यापी नेटवर्क (nationwide network) या संगठित गिरोह की जांच की जाए। शीर्ष अदालत ने यह भी चिंता जताई कि कई राज्यों ने बच्चों के गायब होने से जुड़े डेटा उपलब्ध नहीं कराए हैं, जिससे समस्या का सही आकलन नहीं हो पा रहा है।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि यह जानना जरूरी है कि इन घटनाओं के बीच कोई समान पैटर्न या संगठन है या ये अलग-अलग, बेतरतीब घटनाएं हैं। कोर्ट ने केंद्र से सभी राज्यों से विस्तृत आंकड़े जुटाने को कहा ताकि सही विश्लेषण किया जा सके। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जिन बच्चों को सुरक्षित बरामद किया गया है उनसे पूछताछ की जाए ताकि गायब होने के पीछे जिम्मेदार व्यक्ति या कारणों का पता लगाया जा सके।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों की तरफ से डेटा न देने पर नाराजगी जताई और कहा कि यदि आवश्यक हुआ तो वह सख्त आदेश भी जारी कर सकती है। सुनवाई एक पीआईएल (PIL) पर हुई, जिसमें एक एनजीओ ने तर्क दिया कि देशभर में कई बच्चे अनजाने में गायब हो रहे हैं और उनके कई मामलों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

कोर्ट ने पहले भी केंद्र सरकार को निर्देश दिए हैं कि छह साल का देशव्यापी डेटा जमा करें, लापता बच्चों के मामलों के लिए समन्वित पोर्टल बनाएं और नोडल अधिकारियों (nodal officers) की नियुक्ति करें ताकि इन मामलों की पहचान और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।