नई दिल्ली, 10 फरवरी 2026: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला (Om Birla) ने फैसला लिया है कि उनके खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर निर्णय होने तक वे लोकसभा की कार्यवाही में शामिल नहीं होंगे। इस फैसले से संसद के बजट सत्र के दौरान राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है।
जानकारी के अनुसार, विपक्षी दलों ने लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस सौंपा है, जिस पर 100 से अधिक सांसदों के हस्ताक्षर बताए जा रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि लोकसभा की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष का रवैया पक्षपातपूर्ण (partisan) रहा है और विपक्षी सांसदों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं दिया गया।
कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके सहित कई विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। हालांकि कुछ दलों ने इससे दूरी बनाए रखी है। संविधान के प्रावधानों के तहत लोकसभा अध्यक्ष को हटाने के लिए सदन में बहुमत की आवश्यकता होती है और इस प्रक्रिया के दौरान अध्यक्ष आमतौर पर सदन की कार्यवाही का संचालन नहीं करते।
ओम बिरला के इस कदम के बाद लोकसभा की कार्यवाही पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। सदन में अब अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा और निर्णय के बाद ही सामान्य कार्यवाही सुचारु रूप से आगे बढ़ पाएगी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अविश्वास प्रस्ताव पर कब चर्चा होती है और सदन में इसका क्या परिणाम निकलता है, क्योंकि इसका सीधा असर संसद की आगे की कार्यवाही और सियासी माहौल पर पड़ेगा।