महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में झटका, PM मोदी का देश को संबोधन—महिलाओं से माफी, विपक्ष पर तीखा वार

मतदान के दौरान 298 सांसदों ने इसके पक्ष में वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया।

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  • Updated On - April 19, 2026 / 12:06 AM IST

नई दिल्ली: महिला आरक्षण बिल (Women Reservation Bill) को लेकर लोकसभा (Lok Sabha) में बड़ा झटका लगने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 18 अप्रैल की रात देश को संबोधित (address to nation) किया। इस दौरान उन्होंने देश की महिलाओं से माफी (apology) मांगी और विपक्ष (Opposition) पर जोरदार हमला बोला।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि 33% महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान का 131वां संशोधन विधेयक लोकसभा में पास नहीं हो सका, जिससे देशभर की महिलाओं की उम्मीदों को चोट पहुंची है। उन्होंने स्वीकार किया कि यह एक महत्वपूर्ण अवसर था, लेकिन राजनीतिक कारणों की वजह से इसे सफल नहीं किया जा सका।

उन्होंने कहा कि उनकी सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और उन्हें राजनीति में उचित प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए हर संभव प्रयास जारी रहेंगे। पीएम मोदी ने भरोसा दिलाया कि यह बिल भविष्य में फिर से लाया जाएगा और इसे पास कराने की कोशिशें जारी रहेंगी।

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में विपक्षी दलों जैसे कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी समेत कई पार्टियों पर आरोप लगाया कि उन्होंने राजनीतिक स्वार्थ के कारण इस बिल का विरोध किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने महिलाओं के अधिकारों के साथ समझौता किया और देश की प्रगति में बाधा डालने का काम किया।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि अगर यह बिल पास हो जाता, तो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी 33% तक बढ़ जाती, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में महिलाओं की मजबूत भूमिका होती और देश की राजनीति में संतुलन आता।

गौरतलब है कि इस बिल को पास करने के लिए लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत थी, लेकिन यह आंकड़ा हासिल नहीं हो सका। मतदान के दौरान 298 सांसदों ने इसके पक्ष में वोट किया, जबकि 230 सांसदों ने विरोध किया।

इस विधेयक में महिलाओं को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव था, जिसे परिसीमन प्रक्रिया के साथ लागू किया जाना था। इसी मुद्दे को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए और इसका विरोध किया।

प्रधानमंत्री का यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब संसद में इस मुद्दे पर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। आने वाले समय में महिला आरक्षण का मुद्दा देश की राजनीति और चुनावी बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।