रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र (budget session) के 12वें दिन सदन में जमकर हंगामा देखने को मिला। धमतरी और कांकेर में अवैध प्लॉटिंग का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा, जिस पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई और अंत में विपक्ष ने वॉकआउट कर दिया।
कांग्रेस विधायक अंबिका मरकाम ने राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा से 2024 से 31 जनवरी 2026 तक मिली शिकायतों, खसरों की जांच और कार्रवाई को लेकर सवाल किए। जवाब में मंत्री ने बताया कि धमतरी में 3 और कांकेर में 5 शिकायतें मिली हैं। कुल 175 खसरों में से 8 की जांच की गई है और कार्रवाई अभी प्रक्रियाधीन है। उन्होंने यह भी बताया कि 3 पटवारियों की वेतन वृद्धि रोकी गई है और 67 लोगों को नोटिस जारी किए गए हैं।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने सरकार पर ढिलाई का आरोप लगाया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि हर सत्र में यह मुद्दा उठता है, लेकिन कार्रवाई का स्पष्ट आंकड़ा सामने नहीं आता। उन्होंने पूछा कि पूरे प्रदेश में अब तक कितनी अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई हुई है।
बहस के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि अवैध कॉलोनियां कब बनीं और उनके खिलाफ कार्रवाई कब तक होगी। इस पर मंत्री ने कहा कि नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, लेकिन समय सीमा बताना संभव नहीं है।
सदन में नोकझोंक तब और तेज हो गई जब भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि अवैध कॉलोनियों को विभाग का संरक्षण मिल रहा है। उन्होंने मामले की जांच विधानसभा समिति या ईओडब्ल्यू से कराने की मांग भी उठाई, जबकि मंत्री ने कहा कि जांच के लिए राजस्व विभाग ही सक्षम है।
इसी बीच महासमुंद के सरायपाली वन क्षेत्र के जंगलबेड़ा गांव में नर्सरी और वृक्षारोपण का मुद्दा भी गरमा गया। कांग्रेस विधायक चातुरी नंद ने मूल प्रश्न बदलने का आरोप लगाया, जिस पर पूर्व मुख्यमंत्री ने जांच की मांग की। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस पर 2025 के संदर्भ में जवाब दिया।
शून्यकाल के दौरान ‘जी राम जी’ के विरोध में कांग्रेस द्वारा लाए गए स्थगन प्रस्ताव को लेकर भी जोरदार हंगामा हुआ। भूपेश बघेल ने चर्चा की मांग करते हुए मनरेगा को पहले बेहतर बताया, जबकि भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने इसे विपक्ष की राजनीति करार दिया।
लगातार नारेबाजी और हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही कुछ समय के लिए स्थगित करनी पड़ी। बाद में स्थगन प्रस्ताव खारिज कर दिया गया, जिसके विरोध में विपक्ष ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार कर दिया।
पूरा दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखे आरोप प्रत्यारोप के बीच बीता, जिससे विधानसभा का माहौल पूरी तरह गरमाया रहा।