रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज उद्योगपतियों को सस्ती दर पर जमीन (land allocation) देने और बालोद के जंबूरी कार्यक्रम (jamboree event) में कथित अनियमितता (irregularities) को लेकर जोरदार हंगामा (uproar) हुआ। विपक्ष ने स्कूलों के युक्तियुक्तकरण (rationalization) और अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर वॉकआउट (walkout) कर दिया।
कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने बालोद में आयोजित जंबूरी कार्यक्रम में अनियमितता का मुद्दा उठाते हुए स्कूल शिक्षामंत्री गजेंद्र यादव से सवाल किया कि टेंडर जारी होने से पहले काम कैसे शुरू हो गया और टेंडर खुलने के चार दिन के भीतर काम कैसे पूरा हो गया। इस पर मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब देने से पहले शायरी पढ़ी और कहा कि नेशनल स्तर का काम अलग था और राज्य का काम अलग।
गजेंद्र यादव ने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के बाद स्काउट गाइड संस्था को स्वतंत्र बनाने और चुनाव कराने का निर्णय लिया गया था। बाद में भूपेश बघेल सरकार के दौरान यह तय किया गया कि स्कूल शिक्षामंत्री पदेन अध्यक्ष होंगे और मुख्यमंत्री द्वारा नियुक्त व्यक्ति राज्य मुख्य आयुक्त बनेगा। उन्होंने कहा कि जंबूरी के आयोजन का निर्णय उनके अध्यक्ष बनने से पहले ही हो चुका था और टेंडर प्रक्रिया राज्य कार्यकारिणी की बैठक में तय की गई थी।
राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि 10 दिसंबर को निकला पहला टेंडर निरस्त कर नया टेंडर जारी किया गया, जिसे 4 जनवरी 2026 को खोला जाना था, लेकिन उससे पहले ही काम शुरू हो गया और चार दिन में पूरा भी हो गया। उन्होंने इस मामले की जांच विधानसभा समिति से कराने की मांग की। मंत्री ने कहा कि जांच वहीं होती है, जहां कोई घोटाला हुआ हो।
इसी दौरान उद्योगों को सस्ती दर पर जमीन आवंटन के मुद्दे पर भी सदन में हंगामा हुआ। खल्लारी विधायक द्वारकाधीश यादव ने सवाल उठाया कि उद्योगपतियों को 253 एकड़ जमीन 99 साल के लिए मात्र 4 लाख 82 हजार 302 रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से किस नियम के तहत दी गई।
इस पर उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने जवाब दिया कि राज्य सरकार नवीन ऊर्जा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सौर विद्युत परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित कर रही है। इस जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने जोरदार नारेबाजी की और सदन से बहिर्गमन कर दिया।