छत्तीसगढ़ के पूर्व IAS बी.के.एस. रे का निधन: प्रशासन से साहित्य तक बनाई अलग पहचान, 50 से ज्यादा किताबें लिखीं

बी.के.एस. रे का जन्म 1 जून 1949 को हुआ था। भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और अपनी कार्यशैली तथा प्रशासनिक दक्षता के लिए पहचान बनाई।

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  • Updated On - June 3, 2026 / 06:30 PM IST

रायपुर: छत्तीसगढ़ के पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव और 1972 बैच के वरिष्ठ IAS अधिकारी बी.के.एस. रे (BKS Ray) का निधन हो गया। उनके निधन से प्रशासनिक, साहित्यिक और सामाजिक क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रशासनिक सेवा में लंबा और प्रभावशाली योगदान देने के बाद उन्होंने साहित्य जगत में भी अपनी अलग पहचान बनाई थी। रिटायरमेंट के बाद उन्होंने लेखन (Writing) को अपना प्रमुख कार्यक्षेत्र बनाया और 50 से अधिक किताबों (Books) की रचना की।

बी.के.एस. रे का जन्म 1 जून 1949 को हुआ था। भारतीय प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और अपनी कार्यशैली तथा प्रशासनिक दक्षता के लिए पहचान बनाई। वे छत्तीसगढ़ के अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद तक पहुंचे और लंबे समय तक शासन-प्रशासन से जुड़े रहे।

साल 2009 में सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने अपना पूरा समय साहित्य को समर्पित कर दिया। प्रशासनिक अनुभवों, सामाजिक सरोकारों और समकालीन मुद्दों को उन्होंने अपनी रचनाओं में प्रमुखता से स्थान दिया। उनके लेखन में समाज, व्यवस्था और भ्रष्टाचार जैसे विषयों की गहरी समझ दिखाई देती थी।

बी.के.एस. रे ने अपने साहित्यिक जीवन में 50 से अधिक पुस्तकों का लेखन किया। उन्होंने उपन्यास, कविता संग्रह, नाटक और विभिन्न सामाजिक विषयों पर आधारित किताबें लिखीं। उनकी चर्चित पुस्तकों में The Boy from Bhubaneswar, The Blind Horizon, The Turmoil और कविता संग्रह Something Goes Beyond Me शामिल हैं। उनकी रचनाएं पाठकों और साहित्य प्रेमियों के बीच काफी सराही गईं।

साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। वर्ष 2019 में उन्हें ग्रीस में प्रतिष्ठित ‘सुकरात अवॉर्ड’ से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान साहित्य और बौद्धिक योगदान के लिए दिया गया था, जिसने उन्हें वैश्विक पहचान दिलाई।

प्रशासनिक सेवा से जुड़े रहने के बावजूद वे सार्वजनिक मुद्दों और नीतिगत विषयों पर अपनी स्पष्ट राय रखते थे। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे लेखन और बौद्धिक विमर्श के माध्यम से समाज से जुड़े रहे। उनके निधन पर प्रशासनिक अधिकारियों, साहित्यकारों, शिक्षाविदों और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है।

बी.के.एस. रे का जीवन प्रशासनिक सेवा और साहित्य दोनों क्षेत्रों में प्रेरणा का स्रोत माना जाता है। उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।