मन की बात में पीएम मोदी ने गिनाई बड़ी उपलब्धि: छत्तीसगढ़ में 50 साल बाद लौटे काले हिरण, बारनवापारा बना पुनर्जीवन का केंद्र

प्रधानमंत्री ने बताया कि यह वापसी केवल एक प्रजाति की नहीं, बल्कि देश की जैविक विरासत के पुनरुद्धार का प्रतीक है।

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  • Updated On - April 26, 2026 / 03:41 PM IST

नई दिल्ली, भारत

नई दिल्ली से प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अपने ‘मन की बात’ (Mann Ki Baat) कार्यक्रम के 133वें एपिसोड में छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में काले हिरण (Blackbuck) की वापसी (return) को बड़ी उपलब्धि (achievement) बताया। उन्होंने कहा कि मध्य भारत में वन्यजीव संरक्षण (wildlife conservation) के क्षेत्र में यह एक महत्वपूर्ण सफलता है, जहां लंबे समय तक स्थानीय स्तर पर विलुप्त (locally extinct) हो चुके काले हिरण अब फिर से खुले मैदानों में दौड़ते नजर आ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने बताया कि यह वापसी केवल एक प्रजाति की नहीं, बल्कि देश की जैविक विरासत के पुनरुद्धार का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि वर्षों के लगातार संरक्षण प्रयासों के बाद यह संभव हो पाया है और यह दिखाता है कि सही दिशा में काम करने से प्रकृति को फिर से जीवंत किया जा सकता है।

छत्तीसगढ़ के बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में चलाए गए पांच वर्षीय समर्पित पुनरुद्धार कार्यक्रम ने इसमें अहम भूमिका निभाई। वर्ष 2017 में काले हिरणों को यहां स्थानीय रूप से विलुप्त घोषित कर दिया गया था, जिसके बाद राज्य वन विभाग ने एक रणनीतिक योजना के तहत इनके पुनर्प्रवेश की शुरुआत की।

इस योजना के तहत नई दिल्ली के राष्ट्रीय प्राणी उद्यान और बिलासपुर के कानन पेंदारी प्राणी उद्यान से हिरणों को लाकर यहां बसाया गया। वर्ष 2021 में शुरू किए गए विशेष कार्यक्रम के तहत कुल 77 काले हिरणों को बारनवापारा में पुनर्वासित किया गया, जिनमें 50 दिल्ली से और 27 बिलासपुर से लाए गए थे।

अनुकूल वातावरण, सतत निगरानी और संरक्षण प्रयासों के कारण अब इन काले हिरणों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और वे प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से विचरण कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए इसे देश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बताया। उन्होंने साथ ही गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजाति ग्रेट इंडियन बस्टर्ड का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्नत प्रजनन कार्यक्रमों के जरिए इस प्रजाति के संरक्षण में भी सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

उन्होंने बताया कि हाल ही में गुजरात में अंतरराज्यीय सहयोग के तहत इस पक्षी के चूजों का सफल प्रजनन हुआ है, जिसमें राजस्थान से अंडे लाकर स्थानीय स्तर पर नई आबादी विकसित करने की कोशिश की गई।

प्रधानमंत्री ने मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच बेहतर होते संबंधों की भी सराहना की और कहा कि यह संतुलन भविष्य के लिए बेहद जरूरी है।