मीनाक्षी नटराजन की एक चूक और महेश केवट की किस्मत चमकी, बिना मुकाबले पहुंचे राज्यसभा

शिकायत की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने पाया कि फॉर्म-26 में आवश्यक जानकारी का उल्लेख नहीं किया गया था और इसे अधूरा हलफनामा माना गया। इसके आधार पर उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।

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  • Publish Date - June 11, 2026 / 05:10 PM IST

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बिना किसी मुकाबले के जीत दर्ज कर ली है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद बीजेपी उम्मीदवार महेश केवट निर्विरोध राज्यसभा सदस्य चुने गए। इस पूरे घटनाक्रम ने महेश केवट को अचानक राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला दिया है।

महेश केवट वही नेता हैं जिन्होंने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र पर आपत्ति दर्ज कराई थी। उन्होंने निर्वाचन अधिकारियों को शिकायत देकर आरोप लगाया था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने खिलाफ तेलंगाना में दर्ज एक मामले की जानकारी नामांकन के साथ दाखिल किए गए शपथ पत्र (Affidavit) में नहीं दी। शिकायत की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने पाया कि फॉर्म-26 में आवश्यक जानकारी का उल्लेख नहीं किया गया था और इसे अधूरा हलफनामा माना गया। इसके आधार पर उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।

राज्यसभा निर्वाचन अधिकारी अरविंद शर्मा द्वारा जारी आदेश में कहा गया कि उपलब्ध अभिलेखों और दस्तावेजों की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि उम्मीदवार ने अदालत में दर्ज शिकायत का उल्लेख नहीं किया था। इसलिए नामांकन पत्र वैध नहीं माना जा सकता।

मीनाक्षी नटराजन ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उनकी याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई होनी है, लेकिन उससे पहले ही गुरुवार को निर्वाचन अधिकारी ने महेश केवट को निर्वाचित घोषित करते हुए जीत का प्रमाण पत्र सौंप दिया।

महेश केवट मध्य प्रदेश के पिछड़े वर्ग के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। वे लंबे समय से निषाद-केवट समाज के बीच सक्रिय रहे हैं और प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान रखते हैं। हालांकि उनका राजनीतिक सफर विवादों से भी जुड़ा रहा है। कुछ वर्ष पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में उन्हें भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। बाद में उन्होंने फिर संगठन में वापसी की और धीरे-धीरे नेतृत्व का भरोसा हासिल किया।

भाजपा ने इस बार सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए महेश केवट पर दांव लगाया था। पार्टी नेतृत्व का मानना था कि केवट समाज और अन्य पिछड़ा वर्ग के बीच उनकी मजबूत पकड़ का राजनीतिक लाभ मिलेगा। अब राज्यसभा पहुंचकर महेश केवट राष्ट्रीय स्तर पर अपनी नई राजनीतिक पारी शुरू करेंगे।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज नहीं होता तो तीसरी सीट पर मुकाबला दिलचस्प हो सकता था। लेकिन एक कानूनी और प्रक्रियागत चूक ने चुनाव का पूरा समीकरण बदल दिया और महेश केवट को बिना मतदान के संसद के उच्च सदन तक पहुंचा दिया।